बरेली। पहले तहसीलदार और फिर डीएम कोर्ट के चक्कर लगाकर फरियादी फुटबाॅल बन गए हैं। इसकी जड़ लेखपाल-कानूनगो की रिपोर्ट है, जिस पर डीएम कोर्ट ने भी संदेह जताया है।
19 जून को करन सिंह बनाम ग्राम सभा पीपलसाना चौधरी मामले में डीएम कोर्ट ने फैसला दिया है। करन सिंह ने तहसीलदार न्यायालय के फैसले के विरुद्ध 16 जनवरी 2025 को अपील की थी। उनका कहना था कि प्रकरण में लेखपाल की रिपोर्ट झूठी है।
लेखपाल उस जमीन को खलिहान बताकर उस पर तीन वर्ष से अवैध कब्जा दिखाया है। हकीकत में उनकी मां को वर्ष 1992 में नसबंदी कराने पर जमीन मिली थी। उसी पर पिता ने मकान बनवाया था। डीएम कोर्ट ने अवर न्यायालय के आदेश को निरस्त कर अपने आदेश में लेखपाल की जांच रिपोर्ट पर संदेह जताया है।
आदेश में कहा गया है कि जांच रिपोर्ट पर प्रधान, अपीलकर्ता या गांव के किसी अन्य व्यक्ति के हस्ताक्षर नहीं कराए गए हैं। इस रिपोर्ट पर कानूनगो के भी हस्ताक्षर नहीं हैं। अवर न्यायालय ने लेखपाल या कानूनगो के बयान भी नहीं कराए हैं। जिरह की प्रक्रिया भी अपूर्ण है।
मूल फाइल वापस करते हुए अवर न्यायालय को निर्देश दिए हैं कि दोबारा कार्रवाई पूरी कर वाद का निस्तारण किया जाए। संवाद