बरेली। वैश्विक स्तर पर युद्ध के बदलते माहौल और भारत की सैन्य तैयारियों के बीच पूर्व सैन्य अधिकारी विशिष्ट सेना मेडल से सम्मानित मेजर जनरल विशंभर दयाल ने भारतीय सेना के अनुशासन, रणनीति और जवानों के मनोबल पर विचार साझा किए। अमर उजाला से विशेष बातचीत में अग्निवीर योजना, सेना में तनाव और देश की स्थिति जैसे कई अहम मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी।
मेजर जनरल दयाल ने कहा कि वह खुद अग्निवीर योजना योजना के क्रियान्वयन को लेकर असहमति जता चुके हैं। आधुनिक युद्ध भले तकनीक आधारित हो रहे हों, पर रूस-यूक्रेन और अन्य वैश्विक संघर्षों से साफ है कि जमीन पर तैनात अनुशासित और प्रशिक्षित जवानों का कोई विकल्प नहीं है। कारगिल युद्ध और गलवान घाटी के संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा, चीनी सैनिकों की भारी तादाद पर चंद भारतीय जवान भारी पड़े थे। छह माह की ट्रेनिंग के बाद अल्पकालिक सेवा की योजना से सेना के एचआर स्ट्रेटजी और ट्रेनिंग पर असर पड़ता है। सरकार को इसमें सुधार करना चाहिए।
जवान पर भी पड़ता है सामाजिक बदलाव का असर
सेना, अर्धसैनिक बलों के जवानों में बढ़ते मानसिक तनाव से आत्मक्षति की घटनाओं पर कहा कि सामाजिक बदलाव, परिवार से दूरी, एकल परिवारों के बढ़ते चलन का असर जवानों पर भी पड़ता है। हालांकि, अधिकारियों और जवानों के चयन, प्रशिक्षण में मानसिक मजबूती का ध्यान रखा जाता है। सोशल मीडिया पर सेना पर अभद्र टिप्पणी के मामले पर कहा, भारत का युवा सेना का अनादर नहीं कर सकता। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को सही संस्कार दें।
वैश्विक पटल पर भारत बेहद मजबूत
मेजर जनरल ने कहा कि भारत की स्थिति भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद मजबूत है। भारत को अपनी राष्ट्रीय शक्ति और बाजार की ताकत का इस्तेमाल वैश्विक स्तर पर और सक्रियता से करना चाहिए। भारत किसी भी वैश्विक फैसले को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। युद्ध की परिस्थितियों में भी भारतीय सेना पूरी तरह सशक्त और तैयार है।