बरेली। रामगंगा बैराज का बचा काम पूरा करने के लिए 3289 करोड़ रुपये चाहिए। सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड ने बजट मंजूरी के लिए अब केंद्र में सीडब्ल्यूसी (सेंटर वाटर कमीशन) के पास प्रस्ताव भेजा है। 20 साल बाद प्रस्ताव फिर से सीडब्ल्यूसी को भेजा गया है। इससे पहले 2004 में प्रयास हुए थे। प्रस्ताव मंजूर होने के बाद ही प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो पाएगा।
रामगंगा पर बैराज बनाने के लिए खाका 2004 में ही खींच लिया गया था। तब 323 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर सीडब्ल्यूसी को भेजा गया था। 2010-11 में बैराज का काम शुरू हुआ था। अधिकारियों की मानें तो अनुमति नौ साल के लिए होती है। 2011 में काम शुरू हुआ था। 2019 में अनुमति की मियाद खत्म हो गई। इसके साथ ही काम भी रुक गया।
अब तक 630 करोड़ रुपये बैराज के नाम पर खपा दिए गए हैं। इसमें बैराज व तटबंध ही बना है। करीब 350 किलोमीटर की नहरें बननी थीं जो नहीं बन सकीं। परियोजना के तहत नहरों के लिए 1029 हेक्टेयर जमीन चाहिए। जमीन के अधिग्रहण के लिए ही करीब 1400 करोड़ रुपये की जरूरत है। जमीनों का मूल्य बढ़ने के साथ ही समय के साथ-साथ बजट भी बढ़ता चला गया।
अब सीडब्ल्यूसी को 3289 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। सीडब्ल्यूसी इसकी जांच करेगी। इसके साथ ही देखेगी कि पहले जिन प्रावधानों के तहत अनुमति दी गई थी उसमें हेरफेर तो नहीं किया गया। इसके बाद फिर बजट राज्य सरकार को भेजा जाएगा। बहरहाल जब तक सीडब्ल्यूसी की अनुमति नहीं मिलती रामगंगा बैराज का काम आगे नहीं बढ़ेगा।
वर्जन-
बजट बनाकर केंद्र में सेंटर वाटर कमीशन को भेजा गया है। इससे पूर्व कमीशन से 2004 में अनुमति ली गई थी। बजट को लेकर कमीशन द्वारा जांच पड़ताल करके अनुमति दी जाती है। अनुमति मिलने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा। - धर्मेंद्र वर्मा, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड