बेटा समाजसेवी, लेकिन मां उसे याद नहीं
शहर की राजेरानी प्रतिष्ठित परिवार से हैं। उनकी 88 साल उम्र है। पति लेखराज व्यापार करते थे और करीब 30 साल पहले उनकी मौत हो गई। बेटा मनमोहन तनेजा की शादी कर दी। एक पौत्र-पौत्री भी है। वह कहती हैं कि सब अच्छा चल रहा था, लेकिन मेरी छोटी बहन ही मेरी दुश्मन बन गई और उसने मेरे बेटे को मेरे खिलाफ भड़का दिया। मैं चल नहीं पाती हूं, आंखों से ठीक से दिखाई नहीं देता है। बेटा समाजसेवा करता है, लेकिन उसे मां याद नहीं है। बेटे ने नहीं समझा तो बहू क्या समझेगी।
भूपेंद्र को नौकरों की तरह रखती थी भाभी
50 साल के भूपेंद्र कौर अविवाहित हैं। भाई व्यापारी हैं, उन्हीं के पास रह रही थी। भाभी नौकरों की तरह व्यवहार करती थी। रोजाना मारती थी और भाई भी नहीं बचाते थे। एक दिन भाभी वृद्धाश्रम के बाहर दरवाजे पर छोड़कर चली गई थी। भूपेंद्र कहती है कि अब पांच साल से यही मेरा परिवार है। कम से कम यहां मार तो नहीं पड़ती है। यहां पर रह रहे लोग आपस में एक-दूसरे के दर्द को बांट लेते हैं।
छोटे भाई की खातिर नहीं की शादी
शाहजहांपुर के गिरीश चंद्र पाठक की उम्र 74 साल है। पांच साल से वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। उनके पांच छोटे भाई हैं, भाइयों को पढ़ाने के लिए उन्होंने खुद की शादी न करने का फैसला किया। सभी को पढ़ाया। एक को शिक्षक बनाया। दो प्राइवेट नौकरी में हैं और दो भाई खेती करते हैं। पांचों भाई मिलकर मुझे रोटी नहीं दे सके। खुद कन्हैया गुलाटी के स्कूल में नौकरी शुरु की तो वहां टैंक की सफाई करते हुए एसिड से आंखों की रोशनी चली गई।
बेटी की शादी में बिक गया मकान, अब बेघर
बहेड़ी के 72 साल के रोशन लाल की दो बेटियां है। दोनों की शादी में खुद का मकान बेच दिया। दामाद नौकरी करते हैं, लेकिन शादी करने में घर से बेघर हो गए। पत्नी भी गुजर गई। भाइयों के सहारे रह रहे थे, लेकिन बहुओं को पसंद नहीं था। इस कारण भाई उन्हें वृद्धाश्रम छोड़कर चले गए। चार भाइयों में वह सबसे बड़े है। भाइयों का ज्वैलर्स का काम है। सभी संपन्न है। वृद्धाश्रम में रहते हुए तीन महीने हो गए हैं।