ऑक्सीजन का स्तर 93 था तो फिर क्यों नहीं बचाया जा सका
बरेली। नोडल अधिकारी नवनीत सहगल ने कोरोना से हुई मौतों की गुरुवार को समीक्षा की। संक्रमण से 24 वर्षीय युवती की मौत को गंभीरता से लेते हुए सहगल ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से पूछा कि अगर युवती को 10 दिन से बुखार था तो सर्वे टीम क्या कर रही थी। सर्वे टीम को अगर इसकी जानकारी थी तो उसने क्या कार्रवाई की। ऑक्सीजन स्तर 93 था तो फिर उसे क्यों नहीं बचाया जा सका।
नोडल अधिकारी ने कहा कि एंटीजन टेस्ट और बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने 28 सितंबर को हुई फरीदपुर के सिमरा की 24 वर्षीय युवती की मौत के मामले को गंभीरता से लेकर जानकारी ली तो बताया गया कि युवती को दस दिनों से बुखार और सांस लेने में तकलीफ थी। उसकी कोविड जांच पॉजिटिव आई। अस्पताल में भर्ती करने के समय उसके रक्त में ऑक्सीजन का स्तर 93 था। इस पर नोडल अधिकारी ने सीएमओ से मामले की जांच कर सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार करने को कहा। बोले, निजी अस्पताल यदि ऐसे मामलों में लापरवाही बरत रहे हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और शासन को भी लिखा जाए।