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एडीजी समेत अफसरों ने मजदूरों को बांटा खाना, बुखार नपवाया

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जरुररतमंदों को भोजन के पैकेट बांटते एडीजी और अन्य। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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बरेली। दिल्ली से आई भीड़ को नियंत्रित करना और उन्हें गंतव्य तक भेजना पुलिस प्रशासन की चुनौती बन गई है। बरेली रीजन की करीब सवा सौ बसें दिल्ली से इन लोगों को लेकर आ रही हैं। जरूरत के मुताबिक लोगों को बसों से शाहजहांपुर, सीतापुर, कानपुर तक भेजा जा रहा है। प्रशासन ने कुछ प्राइवेट बसें भी अधिकृत की हैं। एडीजी, एसएसपी ने मजदूरपेशा लोगों को भोजन के पैकेट व पानी उपलब्ध कराया।
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एडीजी जोन अविनाश चंद्र, डीआईजी रेंज राजेश कुमार पांडेय और एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने अलग-अलग समय में शहर के सेटेलाइट बस स्टैंड व अन्य हाईवे के अन्य स्थानों पर पहुंचे। यहां अधिकारियों ने व्यवस्था देखी और मजदूरों को भोजन व अन्य सहूलियत उपलब्ध कराईं। एडीजी ने इन्हें भोजन के पैकेट बांटे। चिकित्सा विभाग की एक टीम बुलवाकर इनका बुखार नपवाया और जरूरत के मुताबिक दवा व सलाह दी गई। एसएसपी ने सेटेलाइट बस स्टैंड पर दिल्ली व अन्य स्थानों से आए मजदूरों से बात की। इन्होंने वाहन न होने की बात बताई तो एसएसपी ने प्रशासन के अधिकारियों से इस बारे में संपर्क किया। लोगों से कहा कि वह दूर दूर रहें, सभी को उनके नजदीकी स्थानों तक भिजवा दिया जाएगा। एएसपी अभिषेक वर्मा, इंस्पेक्टर बारादरी नरेश त्यागी, इज्जत नगर इंस्पेक्टर केके वर्मा ने भी लोगों की मदद की। हालांकि पुलिस प्रशासन के दिए पैकेट के अलावा कोई होटल, रेस्टोरेंट न खुला होने से लोग काफी परेशान रहे। बसें या दूसरे वाहन आते ही लोगों में पहले घुसने को मारामारी मच जाती थी।

एडीजी बोले- घर में दिक्कत हो तो सैनिकों को याद कर लें

एडीजी अविनाश चंद्र ने लॉकडाउन में घरों से बेवजह निकलने वालों पर और सख्ती के निर्देश पुलिस को दिए हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग घरों में रहने की वजह से परेशान हैं उन्हें सैनिकों का ध्यान कर लेना चाहिए जो निर्जन स्थानों व पहाड़ों में महीनों तैनात रहकर सीमाओं की निगरानी करते हैं। उन लोगों का न परिवार पास होता है और न ही मनोरंजन व इंटरनेट की सुविधा होती है। प्रशासन लोगों के घरों तक राशन, सब्जी पहुंचाने की व्यवस्था कर रहा है पर अगर कोई चीज नहीं मिल पा रही तो उसके लिए धैर्य रखें। देश और समाज हित में घरों से बाहर न निकलें। साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें।

प्राइवेट बसों और डग्गामारों ने काटी चांदी

रोडवेज बसों के कम होने की स्थिति में प्रशासन ने लोगों को उनके घर पहुंचाने के लिए प्राइवेट बसों व डग्गामार वाहनों का सहारा लिया। इस तरह के वाहनों को यात्रियों को घर पहुंचाने की अस्थायी अनुमति मिली तो इन्होंने चांदी काट दी। निजी बसों में दिल्ली से बरेली तक पांच सौ रुपये प्रति यात्री तक वसूले गए। बच्चों का पूरा किराया लिया गया। दिल्ली में चलने वाले कई ऑटो भी यहां तक मुसाफिर बुक करके लाए थे। इन्होंने भी मोटी कमाई की। यहां तक कि विलयधाम से शहर के सेटेलाइट स्टैंड तक लोगों को लाने के लिए ऑटो ने पचास रुपये तक वसूले। कई लोग ऐसे थे जिनके पास यह रुपये न थे। ऐसे लोग पैदल ही चलने को मजबूर थे।
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