बरेली। सौंदर्य की चाहत पार्लरों से निकलकर ऑपरेशन थिएटर (ओटी) तक पहुंच गई है। हर माह कॉस्मेटिक प्लास्टिक सर्जरी के 20-25 मामले सामने आ रहे हैं। इसके उलट हाइमनोप्लास्टी में गिरावट दर्ज हुई है। एक दशक पहले हर साल हाइमनोप्लास्टी के 35-40 मामले सामने आते थे, अब एक-दो युवतियां ही ओटी तक पहुंच रही हैं। समाजशास्त्री इसे लोगों की बदलती सोच और बढ़ती जागरूकता से जोड़कर देख रहे हैं।
प्लास्टिक सर्जन के मुताबिक आठ-दस वर्ष पहले कई युवतियां सामाजिक दबाव, विवाह से जुड़ी धारणाओं, व्यक्तिगत वजह से हाइमनोप्लास्टी कराती थीं। वर्ष 2020 के बाद यह आंकड़ा घटने लगा। अब साल में एक-दो सर्जरी ही होती है। वर्ष 2026 में अब तक सिर्फ एक ही सर्जरी हुई है। इसके उलट कॉस्मेटिक प्लास्टिक सर्जरी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
प्लास्टिक सर्जन डॉ. कौशल कुमार के मुताबिक नाक की बनावट, चेहरे की असमानता, जन्मजात विकृति आदि को ठीक कराने, गाइनेकोमेस्टिया (पुरुषों में बढ़े स्तन) से निजात, हेयर ट्रांसप्लांट, चेहरे की झुर्रियां हटवाने समेत सौंदर्य संबंधी अन्य प्रक्रिया के लिए बच्चे-युवा- बुजुर्ग भी ओटी तक पहुंच रहे हैं।