मंडल के 2700 गांव अब भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट से नहीं जुड़ सके हैं। संभागीय परिवहन विभाग ऐसे रूटों का सर्वे कर रिपोर्ट राज्य परिवहन प्राधिकरण को नवंबर में ही भेज चुका है लेकिन अभी तक इसके लिए मंजूरी नहीं मिली है। इसे लेकर आरटीओ स्तर से कई बार लिखा-पढ़ी भी की जा चुकी है।
प्रमुख सचिव परिवहन के निर्देश पर संभागीय परिवहन विभाग ने उन मार्गों का सर्वे शुरू किया, जहां रोडवेज या निजी बसों का संचालन नहीं हो रहा है। इसमें मंडल के 7122 में से 2724 राजस्व गांव ऐसे मिले हैं, जो पब्लिक ट्रांसपोर्ट से अब तक नहीं जुड़े हैं। यहां रोडवेज या निजी बसों का संचालन होना है। इन रूटों की मंजूरी के लिए आदेश राज्य परिवहन प्राधिकरण से आना हैं।
आरटीओ के सर्वे में यह निकली स्थिति
आरटीओ के सर्वे में बरेली जिले के 2149 में 461, बदायूं के 1713 में 153, पीलीभीत के 1440 में 360 और शाहजहांपुर जिले के 2079 में 750 राजस्व गांव ऐसे मिले हैं, जहां रहने वाले लोगों को सार्वजनिक यातायात सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है। इनमें कुछ गांव ऐसे भी बताए जा रहे हैं, जहां आबादी बहुत कम है।
बरेली जिले में इन रूटों पर नहीं पब्लिक ट्रांसपोर्ट
जिले में पब्लिक ट्रांसपोर्ट से न जुड़ने वाले आठ रूट चिह्नित किए गए हैं। इसमें नवाबगंज-बहेड़ी वाया कुंडराकोठी, आंवल-बगरैली-बिसौली, जादवपुर-शाही-धनेटा, मीरगंज-सहोड़ा-शीशगढ़, धनेटा-शेरगढ़, रिठौरा-खाईखेड़ा, नवाबगंज-बिजौरिया-कुंडराकोठी और भोजीपुरा-अभयपुर-अगरासा रूट शामिल हैं।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट से न जुड़ने वाले रूट का सर्वे कर राज्य परिवहन प्राधिकरण को भेजा जा चुका है। वहां से अभी लिस्ट पर अंतिम मुहर लगनी बाकी है।
- आरआर सोनी, आरटीओ