बरेली। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी तो है लेकिन जो डॉक्टर हैं, वे भी अपने ढंग से नौकरी कर रहे हैं। ओपीडी से लेकर वार्ड तक उनका पता लगाना मुश्किल है। ओपीडी में उनके चैंबर या तो खाली पड़े रहते हैं, या वहां इंटर्न (प्रशिक्षु) मरीजों का इलाज करते दिखाई देते हैं। जिला अस्पताल का यह मर्ज इतना लाइलाज हो चुका है कि निरीक्षण करने आने वाले उच्चाधिकारी भी इधर का रुख नहीं करते।
जिला अस्पताल में आठ डॉक्टरों की तैनाती है लेकिन शनिवार को ओपीडी के दौरान दोपहर 12 बजे इनमें से फिजीशियन डॉ. अजय मोहन और नेत्र विशेषज्ञ डॉ. वर्षा ही अपने चैंबर में बैठी हुई थीं। नेत्र विभाग की जांच टीम भी थी लेकिन बाकी सभी चैंबर या तो खाली पड़े थे या वहां बैठे इंटर्न मरीजों को देख रहे थे और उन्हें दवाएं भी लिख रहे थे। हालांकि सभी चैंबरों के बाहर मरीजों की लंबी कतार लगी हुई थी।
संवाददाता खुद अपना परचा बनवाकर सर्जन डॉ. अब्बास अली अंसारी के चैंबर में दिखाने पहुंचा तो वहां बैठे इंटर्न ने जुबानी परामर्श देकर टाल दिया। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. शिव दत्ता के चैंबर में भी इंटर्न ने ही यह जिम्मेदारी अदा की। वरिष्ठ परामर्शदाता फिजीशियन डॉ. आशु अग्रवाल के चैंबर में सन्नाटा पसरा हुआ था। जनरल फिजीशियन का कक्ष भी खाली था। दोनों कक्षों के बाहर लंबी कतार में मौजूद मरीज गर्मी से बेहाल हो चुके थे, फिर भी डॉक्टर के आने का इंतजार कर रही थे।
मरीजों ने किया हंगामा, सीएमएस के फोन पर सवा बजे पहुंचे डॉक्टर, दो बजे ओपीडी बंद
चैंबर नंबर छह में बैठने वाले वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. आशू अग्रवाल को दिखाने के लिए सुबह आठ बजे से टीबी के मरीजो की लंबी कतार लगी हुई थी। तमाम मरीज पीलीभीत और बदायूं जैसी दूरदराज जगहों से भी आए थे। मरीजों का कहना था कि वे पांच दिन बाद दवा लिखाने के लिए अस्पताल आते हैं जहां कभी डॉक्टर उन्हें मिलते हैं और कभी नहीं। अक्सर लंबे इंतजार के बाद ओपीडी बंद होने के समय पहुंचते हैं और 10-15 मरीजों को देखकर लौट जाते हैं। अक्सर मरीजों को बगैर दिखाए लौटना पड़ता है। शनिवार को दोपहर एक बजे तक डॉ. आशु अपने चैंबर में नहीं पहुंचे तो मरीजों ने हंगामा शुरू कर दिया। कई मरीज एडीएसआईसी/सीएमएस डॉ. मेघसिंह के पास पहुंच गए। सीएमएस ने डॉ. आशु को फोन करने के बाद मरीजों को बताया कि वह राउंड पर हैं और पांच मिनट में चैंबर में पहुंच जाएंगे। करीब 1:20 बजे डॉ. आशु चैंबर में पहुंचे। एक बार फिर मरीजों की लंबी लाइन लग गई, लेकिन दोपहर दो बजे एक्स रे और दवा केंद्र बंद होने के बाद ज्यादातर मरीजों को फिर आने की हिदायत देकर लौटा दिया गया।
महिला का गुस्सा... अपना क्लिनिक तो चला लें डॉक्टर, अस्पताल क्यों आएंगे
ओपीडी के चैंबर नंबर छह के बाहर लंबे समय तक इंतजार के बावजूद डॉक्टर नहीं पहुंचे तो एक महिला मरीज बुरी तरह बिफर गई। शोर मचाते हुए उसने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि डॉक्टर को अपना प्राइवेट क्लिनिक चलाने से ही फुर्सत नहीं है। वह जिला अस्पताल क्यों आएंगे। महिला ने बताया कि उसकी जेठानी का इन्हीं डॉक्टर ने अपने प्राइवेट क्लिनिक में इलाज किया है। एडीएसआईसी किसी भी डॉक्टर का प्राइवेट क्लिनिक होने से इनकार करते रहे।
डॉक्टर न इंटर्न, फिर कौन देख रहा था हड्डी रोग विशेषज्ञ के चैंबर में मरीज
एडीएसआईसी/सीएमएस डॉ. मेघ सिंह ने हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. शिव दत्ता के चैंबर में इंटर्न के मरीजों का इलाज करने की बात मानने से यह कहकर इनकार कर दिया कि वहां तो कोई इंटर्न है ही नहीं। इस पर उन्हें हड्डी रोग विशेषज्ञ के चैंबर में लिखी गई दवाओं परचा दिखाने के साथ यह बताया गया कि इसका वीडियो भी है तो वह निरुत्तर होकर जांच कराने की बात कहने लगे। इससे पहले वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. आशु अग्रवाल का भी उन्होंने यह कहकर बचाव किया कि उनके पास डेढ़ सौ से ढाई सौ मरीज भर्ती हैं, इसीलिए कभी बैठते हैं और कभी उन्हें देखने उठ जाते हैं। उनसे पूछा गया कि जिला अस्पताल में सिर्फ साढ़े तीन सौ बेड हैं तो क्या इनमें आधे से ज्यादा मरीज अकेले डॉ. आशु के हैं तो उन्होंने कन्नी काट ली। इंटर्न के मरीजों को देखने के सवाल पर बोले, सामान्य बीमारियों में इंटर्न परामर्श दे सकते हैं। डॉक्टर क्यों अपने चैंबर से नदारद थे, इस सवाल पर कुछ नहीं बोले।
वर्जन
अगर डॉक्टरों की कमी है तो मरीजों की सुविधा के लिए एक-दो डॉक्टर पुरुष अस्पताल में अटैच किए जा सकते हैं। जो डॉक्टर देरी से बैठ रहे हैं, उनके लिए सीएमएस को चिठ्ठी लिखकर व्यवस्था ठीक करने को कहा जाएगा। डॉ. बलवीर सिंह, सीएमओ