बरेली। किसान आंदोलन के तहत भारत बंद के आह्वान का स्थानीय बाजारों पर कोई असर नहीं दिखा। मंगलवार सुबह से बाजार और मंडी में चहल पहल शुरू होना शुरू हो गया था। सुबह खानपान के सजने वाले स्टाल भी लगे। हालांकि बाजार की सड़कों पर भीड़भाड़ अन्य दिनों की अपेक्षा कम दिखी। घनी बस्ती वाले मुस्लिम इलाकों में जरूर आंदोलन का असर दिखाई दिया।
मंगलवार सुबह 11 बजे से बाजारों में चहलपहल शुरू हो गई थी। बंद से बेफिक्र दुकानदार और ग्राहक बाजार में पहुंचने लगे थे। सामान्य दिनों की तरह करीब 12 बजे तक सभी प्रमुख शोरूम, प्रतिष्ठान, सराफा दुकानें आदि खुल गई थीं। आलमगिरीगंज, बड़ा बाजार, साहूकारा, किला, कोहाड़ापीर, बांसमंडी, कुतुबखाना, श्यामगंज, सीबीगंज, सुभाषनगर, सिविल लाइंस, कॉलेज रोड, बीआई बाजार, सदर बाजार आदि बाजारों में ग्राहकों का सामान्य आवागमन होता रहा। लेकिन आम दिनों की तरह बाजार की सड़कों पर भीड़भाड़ कम रही। दुकानदारों ने बताया कि मंगलवार और शनिवार के दिनों में बाजार कुछ हल्का रहता है। इसके अलावा भारत बंद की खबर सुनकर संभवत: बाजारों में लोग कम आए लेकिन इसका कारोबार पर कोई असर नहीं दिखा। व्यापारी नेता राजेंद्र गुप्ता, ऋतुराज बास, दुर्गेश खटवानी आदि बाजार में भ्रमण करते रहे।
खानपान स्टाल सुबह से ही लग गए
सात बजे से खानपान के स्टाल लगना शुरू हो गए थे। सुबह समोसा, जलेबी और अन्य नाश्ता कारोबार भी होता रहा। ग्राहक सामान्य दिनों की तरह इन स्टाल और दुकानों पर देखे गए। सराफा, साहूकारा, सिविल लाइंस, बिहारीपुर, पीलीकोठी श्यामगंज, डीडीपुरम, कॉलेज रोड आदि स्थानों पर हर दिन अस्थायी स्टालों पर लाखोें रुपये का कारोबार होता है। यहां पर बंद का कोई असर नहीं दिखा।
दरगाह के पास बाजार में सन्नाटा
चूंकि आईएमसी भी नए कृषि कानून के विरोध में शामिल थी इसलिए दरगाह आला हजरत के आसपास भारत बंद का असर देखने को मिला। यहां करीब 90 फीसदी दुकानें बंद रहीं। वहीं अधिकांश व्यापारी शहर में हो रहे घटनाक्रम को देखने निकले हुए थे। कई टीवी व इंटरनेट पर राष्ट्रीय स्तर पर हो रही गतिविधियां देखते रहे।
सैलानी में आधी से ज्यादा दुकानें बंद
एक ओर जहां बिहारीपुर, सुभाषनगर जैसी बस्तियों में दुकानें पूरी तरह खुली रहीं वहीं सैलानी इलाके में आधी से ज्यादा दुकानें बंद रहीं। दोपहर में यहां दुकानें बंद कर लोग बाहर गपशप कर रहे थे। वहीं शाम के वक्त सैलानी का भी काफी बाजार खुल गया था।