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‘खनन दानव’.. बीसलपुर बड़ा बाईपास चौराहे पर मंडराते मौत के खतरे

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बड़ा बाईपास पर बीसलपुर मोड़ हुआ खतरनाक। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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कई मौतों के बाद भी फ्लाईओवर नहीं, लोगों की मांग जल्द बने फ्लाईओवर
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बरेली। दिल्ली-लखनऊ हाई को जोड़ने वाले बड़े बाईपास पर नवदिया झादा में बीसलपुर रोड पर खतरनाक कट है। बड़ा बाईपास चौराहे से होकर गुजरने वाली खनन माफिया की रेत-मिट्टी लदी ट्रॉलियां यहां होने वाले हादसों की सबसे बड़ी वजह हैं। नदियों, नहरों और बीसलपुर इलाके के गावों से रेत-मिट्टी खनन कर लाने वाली ये ट्रॉलियां आसपास के इलाके में मौत के दानव के नाम से कुख्यात हैं। रही सही कसर तेज रफ्तार वाहन पूरी कर देते हैं। हर साल यहां हादसों में दर्जनों जानें चली जाती हैं। लोग यहां लगातार फ्लाईओवर निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
एनएच-24 पर शहर के बाहर रजऊ परसपुर और परसाखेड़ा के बीच नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने बड़ा बाईपास बनाया है। इस पर नवदिया झादा और पुरनापुर के पास बरेली से बीसलपुर जाने वाली सड़क का कट है। बरेली से बीसलपुर के बीच हर दिन सैकड़ों वाहन बड़े बाईपास को पार करके निकलते हैं। यहां एक साल में हादसों में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। कई घायल हुए हैं। यह सड़क अब बड़े बाईपास के कट से बीसलपुर तक नेशनल हाईवे को हस्तांतरित हो चुकी है। इससे इस रोड पर यातायात का दबाव और बढ़ गया है। हादसों का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है। अब यहां आसपास इलाकों में खनन माफिया धड़ल्ले से दिन रात खनन में लगे हैं। उनकी मिट्टी-रेत लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दिनभर मौत बनकर सड़कों पर दौड़ती हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, खनन दानवों की ट्रैक्टर ट्रालियों की चपेट में आकर कई मौतें हो चुकी हैं। लोग यहां फ्लाईओवर की मांग कर रहे हैं, लेकिन इसके निर्माण की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
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लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता देवेश कुमार तिवारी ने बताया कि फ्लाईओवर का प्रस्ताव बनाकर एनएचएआई मुरादाबाद को सौंपा गया है। आगे उन्हें ही इस पर काम करना है। करीब एक हजार मीटर की लंबाई और सौ करोड़ के अनुमानित बजट की एक रिपोर्ट बनाकर एनएचएआई को सौंपी गई थी।

बीसलपुर रोड के खूनी कट पर अक्सर होते हैं हादसे

यहां जनवरी, 2019 में कोहरे की वजह से एक ट्रक ने कचौली गांव की एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को टक्कर मार दी थी। इसमें कई लोग घायल हुए थे। फ रवरी 2019 में रात में मुरादाबाद से एक परिवार बहू को विदा कराने के लिए हरदोई जा रहा है। इस कट के पास बीसलपुर की तरफ से आ रही एक कार की टक्कर हो गई। इसमें मुरादाबाद के दो लोगों की मौत हो गई थी। मई 2019 में एक ऑटो और डीसीएम के बीच टक्कर हो गई थी। दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके अलावा भी यहां पहले भी हुए हादसों में कई लोग जान गंवा चुके हैं।

बीसलपुर चौराहे पर सड़क किनारे खड़े रहते हैैं वाहन

बड़ा बाईपास नवदिया झादा में बीसलपुर रोड पर खतरनाक कट के पास में ही हाइवे के किनारे ट्रक और ट्रैक्टर खड़े रहते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह हर समय सड़क किनारे इसी तरह खड़े रहते हैं और इन्हें यहां से हटवाया नहीं जाता है। इन वाहनों के कारण भी आए दिन यहां हादसे होते हैं। खासकर रात के समय में इन खड़े वाहनों से दूसरे वाहन टकरा जाते हैं।

सबसे अधिक छात्रों को खतरा

बीसलपुर बड़ा बाईपास चौराहे के आस पास कई इंटर कॉलेज हैं। दोपहर में छुट्टी के दौरान एक साथ सैकड़ों की तादात में विद्यार्थी हाईवे की ओर सड़क पार करने के लिए पहुंचते हैं। सड़क पार करते समय बाइक और साइकिल सवार विद्यार्थियों को बीच हाईवे पर ही रुकना पड़ता है। जब ट्रक निकलना बंद होते हैं, तब कहीं वे चौराहा पार कर पाते हैं। कई बार तेजरफ्तार वाहनों के वजह से हादसे भी हुए हैं।

हाईवे चौराहे की सभी सड़कों पर बेशुमार अवैध कब्जे

हाईवे के चौराहे की सभी सड़कों पर बेशुमार अवैध कब्जे हैं। सड़क के किनारे कब्जे कर होटल, ढाबे, चाय की दुकानें और फल के ठेले लगाकर यहां कब्जा कर लिया है। इन्हीं ढाबे, दुकानों के आगे चाय पानी करने वाले लोग अपने वाहनों को वहीं सड़क किनारे ही लगा देते हैं। इससे भी यहां यातायात बाधित होता है।

लोगों की मांग, जल्द बने फ्लाईओवर

यहां हाईवे पर फ्लाईओवर का निर्माण बेहद जरूरी है। आए दिन हादसे होते हैं। खासकर सर्दियों में हादसों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में जरूरी है कि यहां फ्लाईओवर का निर्माण जल्द किया जाए। -अंशू शर्मा।

शहर से बीसलपुर की तरफ जाने वाले वाहनों को हाइवे चौराहे पर रूकना पड़ता है। आधा चौराहा पार करने के बाद भी बीच में रूककर दूसरी लेन से निकल रहे वाहनों के निकल जाने का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में हादसों की आशंका अधिक रहती है। यहां जल्द फ्लाईओवर का निर्माण कराना जरूरी है। - गिरिराज किशोर पाल।

हाईवे पर यातायात का दबाव बहुत अधिक है। कई लोग हादसों में जान गंवा चुके हैं। पिछले तीन सालों में करीब 20 से अधिक लोगों की मौत यहां हो चुकी है। ऐसे में शासन-प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए और तत्काल यहां फ्लाईओवर के निर्माण के लिए आगे आना चाहिए।

- परमजीत सिंह।

हाईवे के आसपास कई स्कूल हैं और छुट्टी के समय सैकड़ों की संख्या में बच्चे सड़क पार करते हैं। ऐसे में हादसे की आशंका सबसे अधिक होती है। वहां नियमित यातायात पुलिस की तैनाती भी नहीं होती है। ऐसे में विभागीय अधिकारियों को वहां जल्द से जल्द फ्लाईओवर के निर्माण के लिए प्रयास करना चाहिए। - हरजीत सिंह।

रेत बजरी वालों ने बीसलपुर रोड को भी नहीं छोड़ा

बरेली। शहर की प्रमुख सड़कों और चौराहों पर रोज कब्जे हो रहे हैं, लेकिन सिस्टम सो रहा है। कोई प्रभावी कार्रवाई न होने से कब्जेदारों के हौसले भी बढ़ रहे हैं। अभी तक स्टेडियम रोड, पीलीभीत रोड, सीबीगंज रोड पर भरपूर कब्जे थे। अब कब्जेदारों ने बीसलपुर रोड को भी नहीं छोड़ा है। यहां सड़क पर धड़ल्ले से रेत-बजरी वाले कारोबार कर रहे हैं। हार्डवेयर की दुकानें सड़क किनारे तक आ गई है। यूनीवर्सिटी दीवार से सटकर ईंट, रेत का काम हो रहा है। नगर आयुक्त अभिषेक आनंद ने बताया कि अभियान चलाकर लगातार कब्जों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। टीम भेजकर कार्रवाई की जाएगी।
स्थान- रूहलेखंड पुलिस चौकी मोड़
पीलीभीत बाईपास से बीसलपुर की ओर मुड़ते ही हालांकि रुहेलखंड पुलिस चौकी है लेकिन पुलिस का खौफ नजरअंदाज यहीं से सड़क पर कई रेत-बजरी का अवैध कारोबार करने वालों का कब्जा शुरू हो जाता है। इन लोगों ने बजरी के ढेर इस बेपरवाही से सड़क किनारे डाल रखे हैं कि बजरी सड़क तक फैली हुई है। खुद पुलिस ने भी तमाम लावारिस वाहनों को सड़क किनारे खड़ा कर रखा है। यहां अवैध बस अड्डा भी चल रहा है। यहां से बसें बीसलपुर तक जाती है।
स्थान- यूनीवर्सिटी दीवार की आड़ में कब्जे।
रूहेलखंड चौकी के आगे करीब सौ मीटर तक रूहलेखंड पुलिस चौकी की आड़ में रेत, ईंट और बजरी वालों ने कब्जा कर इस पूरे हिस्से को घेर लिया है। यहां धड़ल्ले से इनका अवैध कारोबार चल रहा है और पुलिस की ओर से भी इन पर कभी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।
स्थान- हरूनगला मोड़
हरूनगला मोड़ पर अस्पताल संचालकों ने आधी सड़क तो सिर्फ पार्किंग से घेर रखी है। सड़क की पटरी तक अस्पतालों के गेट हैं और इसके बाद पटरी और सड़क तक पार्किंग बना दी है। इसी के आस पास हार्डवेयर की दुकानों ने पाइप व पानी की टंकियों को सड़क किनारे तक रख लिया है। इससे यहां मोड़ पर बमुश्किल बीस फीट सड़क ही बची है।
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स्थान- गोल्डन ग्रीन पार्क
यहां सड़क पर दुकानदारों ने एक तरफ रेत-बजरी के ढेरों को सड़क तक डाल रखा है। रेत आधी सड़क तक आ गई है और यहां फिसलन बढ़ गई है। अक्सर बाइक सवार ब्रेक लगाने पर यहां फिसल जाते हैं। सही हाल थोड़ा आगे बढ़ने पर हरूनगला बिजलीघर के पास का है। यहां भी कब्जेदारों ने सड़क घेर रखी है। आगे नकटिया पुल के पास रेत बजरी और ईंट का व्यापार कर रहे लोगों ने पटरी का पूरा हिस्सा कब्जे में ले लिया है और सड़क के हिस्से को भी दबा लिया है।
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