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मौसम बदलते ही अपने वतन लौटने लगे प्रवासी परिंदे

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उड़ान भरते परिंदे।
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लगभग तीन महीने के लिए एशिया और यूरोप के ठंडे देशों से विभिन्न प्रजातियों के पक्षी आते हैं यहां
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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व के जलाशयों, झीलों समेत बफरजोन के मैलानी रेंज की नगरिया झील में हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर आए प्रवासी परिंदे अब अपने वतन लौटने लगे हैं। इस बार गर्मी देर से शुरू होने के कारण प्रवासी परिंदों का लौटना मार्च के अंतिम सप्ताह से शुरू हुआ है। हजारों पक्षियों के कई झुंड पिछले पांच-छह दिनों में उड़ान भर चुके हैं, जो बचे हैं वे वापसी की उड़ान भरने की तैयारी में हैं।
सर्दियों के मौसम में ठंडे देशों का तापमान जीरो डिग्री सेल्सियस के नीचे पहुंच जाता है। झीलों का पानी जमकर बर्फ में तब्दील हो जाता है। ऐसे में पक्षियों के आवास और भोजन की समस्या पैदा होती है। ठंडे देशों में यह मौसम इनके प्रजनन के लिए भी अनुकूल नहीं रहता। तब यह भारत जैसे गर्म देशों में आ जाते हैं। तराई क्षेत्र में बड़ी संख्या में झीलें और तालाब हैं, जो इनके प्रवास स्थल बनते हैं। किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल और दुधवा का भादीताल इनकी पसंदीदा जगह रही हैं। यहां इन्हें अनुकूल प्रकृतिक आवास, प्रजनन का अनुकूल वातावरण ही नहीं पर्याप्त सुरक्षा और स्थानीय लोगों के अलावा सैलानियों का दुलार भी मिलता है। हालांकि शिकारी मौका पाकर इनका शिकार भी कर लेते हैं, लेकिन आसपास रहने वाले लोगों की सतर्कता और वन कर्मियों की पेट्रोलिंग से यहां शिकार कम ही हो पाता है, जिन दिनों यह विदेशी पक्षी यहां प्रवास करते हैं उन दिनों यहां पक्षी प्रेमियों, सैलानियों और नेचर फोटोग्राफरों का भी जमावाड़ा रहता है, जो कई-कई दिनों तक यहां रुककर पक्षियों की गतिविधियों का अध्ययन करते हैं।
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सर्दी में दुधवा के भादीताल, कुकरागढ़ा और मैनहन झीलें रहती हैं परिंदों से गुलजार
दुधवा टाइगर रिजर्व के दुधवा नेशनल पार्क स्थित भादीताल के अलावा किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल, कुकरगढ़ा समेत बफरजोन की मैलानी रेंज और बांकेगंज कस्बा से सटी नगरिया झील में हर साल मध्य एशिया और यूरोप के ठंडे देशों से विभिन्न प्रजातियों के पक्षी हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर तराई के जलाशयों में आते हैं। यह पक्षी मध्य नवंबर से आना शुरू होते हैं। दिसंबर और जनवरी के महीने में जिले की नगरिया झील, सेमरई, किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल, दुधवा के भादीताल, कुकरागढ़ा और मैनहन झीलों समेत जिले के सभी जलाशय रंग-बिरंगे परिंदों से गुलजार रहते हैं। इन पक्षियों की चहचहाहट से वातावरण गूंजता रहता है। दिसंबर, जनवरी और फरवरी तीन माह यहां प्रवास करने के बाद फरवरी के अंत से मार्च के अंतिम सप्ताह तक प्रवासी परिंदे अपने वतन लौट जाते हैं।
टाइगर रिजर्व के जलाशयों में आते हैं ये प्रवासी परिंदे
दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी समेत नगरिया झील में मुख्य रूप से यूरोप, मध्य एशिया, पूर्वी साइबेरिया, चीन और लद्दाख से खूबसूरत रंग-बिरंगे पक्षी आते हैं। इसमें अबलक, गुर्चिया बत्तख, ब्राहमानी डक, कूट, मून हेन, ग्रे लेग गूस, टस्टेड डक समेत कई प्रजातियों के पक्षी हजारों की संख्या में यहां आते हैं।
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गर्मी की दस्तक के साथ ही ठंडे देशों से आने वाले प्रवासी परिंदों की वापसी शुरू हो गई है। अब तक बड़ी संख्या में प्रवासी परिंदे वापस जा चुके हैं, जो बचे हैं वे वापसी की उड़ान भरने की तैयारी में हैं। टाइगर रिजर्व के जलाशयों में तीन माह प्रवास के दौरान प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं।
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/ फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व
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