कोर्ट ने तत्कालीन पुलिस व प्रशासनिक अफसरों को भी आड़े हाथ लेकर आदेश की पत्रावली मुख्यमंत्री कार्यालय भेजने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद मौलाना कोर्ट में हाजिर नहीं हुए तो 11 मार्च 2024 को कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। दो दिन बाद दोबारा यही वारंट जारी किया गया। इस बीच मुकदमे के एक आरोपी ने एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट से सुनवाई हटाने की मांग की थी। तब जिला जज कोर्ट ने मामले की सुनवाई अपने ही यहां सुरक्षित कर ली।
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चार राज्यों में घूमी थी पुलिस, नहीं मिले मौलाना
एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट ने प्रारंभिक दौर में लापरवाही के लिए प्रेमनगर इंस्पेक्टर के खिलाफ जांच कराने का आदेश दिया था। फिर सीओ प्रथम को जिम्मेदारी दी गई। वह भी गिरफ्तार नहीं कर सके तो एसएसपी को गिरफ्तारी की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद पुलिस की दस टीमों ने चार राज्यों में मौलाना की तलाश का दावा किया। पुलिस कई दिन बाद भी सफल नहीं हो सकी और केस दूसरी अदालत में ट्रांसफर होते ही रात को मौलाना तौकीर बरेली अपने घर आ गए। कोर्ट ने उनसे 27 मार्च को पेश होने की अपेक्षा की थी। इस बीच वह बीमार पड़ गए। समर्थकों के मुताबिक वह अभी तक दिल्ली के अस्पताल में भर्ती हैं। मौलाना पक्ष से सुप्रीम कोर्ट में भी पैरवी की गई है, वहां भी प्रक्रिया चल रही है।
ये है कानूनी प्रक्रिया
विधि विशेषज्ञों के मुताबिक कोर्ट जब किसी आरोपी को फरार घोषित करता है तो पुलिस को 82 की कार्रवाई का नोटिस जारी किया जाता है। इसे संबंधित शख्स के दरवाजे पर चस्पा कर पुलिस को मुनादी करनी होती है। करीब महीने भर के अंतराल में आरोपी के न मिलने पर 83 (कुर्की) का नोटिस चस्पा किया जाता है।
स्वस्थ होते ही हाजिर होंगे आईएमसी प्रभारी
आईएमसी के मीडिया प्रभारी मुनीर इदरीशी ने बताया कि पार्टी प्रभारी अभी दिल्ली के अस्पताल में ही हैं। उनके स्वास्थ्य में काफी सुधार है पर अभी डॉक्टरों ने उन्हें डिस्चार्ज नहीं किया है। वह कानून का सम्मान करते हैं। जैसे ही डॉक्टर उन्हें पूरी तरह स्वस्थ मानेंगे, वैसे ही वह बरेली आकर कोर्ट में हाजिर होंगे।
एसएसपी घुले सुशील चंद्रभान ने बताया कि कोर्ट ने जो भी आदेश दिया है उसका पूरी तरह पालन कराया जाएगा। अभी आदेश की प्रति नहीं मिली है, उसका अवलोकन करने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।