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जिंदा हकीकत का नाम है मसलक-ए-आला हजरत : उलमा

Sun, 09 Aug 2026 12:41 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
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बरेली। बरेली से दीन और सुन्नियत का नाता आला हजरत के दादा मुफ्ती रजा अली खान के वक्त से जारी है। मसलक-ए-आला हजरत जिंदा हकीकत का नाम है। अहले सुन्नत का पैगाम मोहब्बत है, उसे आम करो। जंग जब अपनों से हो तो हार जाना ही बेहतर है। बरेलवी उलमा सुन्नी विचारधारा को मजबूत करें। ये बातें उर्स-ए-रजवी के मौके पर शनिवार को इस्लामिया मैदान पर आयोजित जलसे में मुफ्ती अर्सलान रजा कादरी ने कहीं।
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इसमें देश-विदेश के सज्जादगान व नामवर उलमा ने मजहब-ए-इस्लाम, पैगंबर-ए-इस्लाम की तालीमात, मसलक-ए-आला हजरत के मिशन पर रोशनी डाली। मुफ्ती फैज मियां ने कहा कि मुफ्ती रजा अली खान ने अंग्रेजों के खिलाफ फतवा दिया था। कारी यूसुफ रजा संभली ने कहा कि मुसलमान शरीयत के साथ अपने मुल्क के प्रति भी वफादार रहें। गाना बजाना और डीजे से बचें। इस्लाम की सही तस्वीर पेश करें।
मुफ्ती इमरान हनफी, अल्लामा तौसीफ रजा मिस्बाही व मौलाना साजिद रजा ने शिक्षा की कमी को मुसलमानों के पिछड़ेपन की वजह बताया। तालीम हासिल करने पर जोर दिया। मुफ्ती जिलानी ने कहा कि आज मस्जिदों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। हमारे एक उलमा चार साल से और आला हजरत का शहजादा एक साल से जेल में बंद हैं और लोग अब भी संजीदा नहीं हैं। मौलाना फारूक नक्शबंदी, कारी इकबाल मुरादाबादी, मौलाना जाहिद रजा, जिक्रुल्लाह, मुफ्ती अय्यूब खान, मौलाना मुख्तार बहेड़वी ने भी खिताब किया।
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यह कार्यक्रम दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान की सरपरस्ती, सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी की सदारत और सैयद आसिफ मियां की निगरानी में हुआ। इस दौरान खानकाह तहसीनिया के सज्जादानशीन मौलाना हस्सान रजा खान, अहसान रजा, शीरान रजा खान, मोअज्जम रजा खान, जुबैर रजा खान, सय्यद मुस्तफा मियां, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष हाफिज नूर अहमद अजहरी, दरगाह शाहदाना वली के प्रबंधक अब्दुल वाजिद नूरी मौजूद रहे।
उर्स मुकम्मल होने पर सज्जादानशीन अहसन मियां व सैयद आसिफ मियां ने पुलिस-प्रशासन, रेलवे, नगर निगम, मीडिया, नागरिक सुरक्षा संगठन, सभी लंगर व सबील कमेटियों, रजाकारों, टीटीएस वालंटियर्स, रजा फोर्स का शुक्रिया अदा किया।
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ईद मिलादुन्नबी पर पाकिस्तानी ध्वज से मिलता जुलता झंडा न लगाएं
मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने कहा कि जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी करीब है। मुसलमान अपने घरों पर इस्लामी झंडे लगाएंगे। कई बार इस्लामी झंडे को गलतफहमी में पाकिस्तानी झंडा समझ लिया जाता है। पिछले साल कुछ लोगों पर मुकदमे भी हुए। इसलिए जरूरी नहीं कि हरा झंडा ही लगाया जाए। सफेद, काला या सुनहरा झंडा भी लगा सकते हैं। पाकिस्तान के झंडे से मिलते-जुलते झंडे लगाने से बचें। चुनावी माहौल है। सियासी पार्टियों से होशियार रहते हुए आपसी सौहार्द के साथ अपने देश को विश्व गुरु बनाने के लिए काम करें।
इमदादुल कारी की 11वीं जिल्द का विमोचन
जलसे के दौरान मुफ्ती आकिल रजवी की लिखी किताब सही बुखारी के उर्दू अनुवाद इमदादुल कारी की 11वीं जिल्द का विमोचन दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां ने किया।
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जगह-जगह जल सेवा, भोजन भी वितरित
बरेली। जायरीन की खिदमत में बजरंग ट्रांसपोर्ट पर जल सेवा की गई। इस दौरान राहगीरों, वाहन चालकों और आम लोगों को भी शीतल जल पिलाकर राहत पहुंचाई गई। कार्यक्रम में क्षेत्रीय पार्षद हरिशंकर लोधी, अमित अग्रवाल, अतुल अग्रवाल, प्रदीप खंडेलवाल, ओम प्रकाश का सहयोग रहा। अय्यूब खां चौराहे पर भी स्थानीय नागरिकों ने शीतल पेय और भोजन वितरित किए।
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