एसटीएफ ने सद्दाम के पास से दो मोबाइल फोन और एक कार बरामद की है। इस कार का इस्तेमाल हत्या के वक्त किया गया। इसका भी रजिस्ट्रेशन नंबर 0016 है। यह गिरोह इसी नंबर की गाड़ियां लेता है। इस कार को लोगों की नजरों से छिपाकर रखा गया था। सूत्र बताते हैं कि हत्याकांड के बाद इसी नई कार से असद, जैनब, शाइस्ता और शूटरों की भी फरारी के दौरान मदद की गई। असद के एनकाउंटर और अतीक-अशरफ की हत्या के बाद सद्दाम इस कार का इस्तेमाल खुद ही कर रहा था। जिस अब्दुल बारी के नाम यह कार है, वह अधिकतर सद्दाम के साथ ही रहता था। पुलिस कार मालिक अब्दुल बारी पर भी शिकंजा कस सकती है।
हत्याकांड से 21 दिन पहले झांसी गया था सद्दाम
उमेश पाल की हत्या के बाद शूटरों को कहां छिपाना है, इसकी तैयारी भी पहले से की गई थी। सद्दाम उमेश पाल की हत्या से 21 दिन पहले दो फरवरी को अपनी सफेद कार से झांसी गया था। झांसी में तेज रफ्तार में कार चलाने के कारण उसका चालान भी हुआ था। सूत्र बताते हैं कि हत्याकांड से पहले झांसी जाकर सद्दाम ने असद और उसके साथी मोहम्मद गुलाम के छिपने का इंतजाम किया था। अप्रैल में असद और मोहम्मद गुलाम का झांसी जिले के पारीछा डैम ब्रिज के पास यूपी एसटीएफ ने एनकाउंटर कर दिया था।
सद्दाम की प्रेमिका को बेकसूर मानकर चल रही पुलिस
सद्दाम और पूर्व मंत्री की बेटी के बीच चल रही प्रेम कहानी के बारे में उसके सभी गुर्गों को पता था। सद्दाम की प्रेमिका उससे मिलने खुशबू इन्क्लेव वाले कमरे पर भी जाती थी। मकान मालिक और पड़ोसी उसे सद्दाम की पत्नी समझते थे। उमेश पाल हत्याकांड के बाद जब पुलिस प्रेमिका के घर नोटिस देने पहुंची तो वह और उसका परिवार तनाव में आ गया था। इसके बाद ही प्रेमिका दिल्ली रहने चली गई। दिल्ली में वह मेकअप आर्टिस्ट के तौर पर पहचान बना रही है। उसको नोटिस देकर पूछताछ की बात कही जा रही है, हालांकि अधिकारी मान रहे हैं कि सद्दाम से दोस्ती के अलावा उसके कामों से प्रेमिका का कोई लेनादेना नहीं था।
लल्ला गद्दी के साथ लेता था चाय की चुस्कियां
सद्दाम और उसका मददगार लल्ला गद्दी रात में शहर में घूमते थे। श्यामगंज से मालियों की पुलिया तक तीन चाय की दुकानों पर रात दो बजे तक भीड़ जमा रहती है। वह इन दुकानों पर भी लल्ला गद्दी के साथ चाय की चुस्कियां ले चुका है। इन दुकानों पर आए दिन विवाद भी होता है। अभी तीन-चार दिन पहले ही कार सवार परिवार के साथ मारपीट की गई थी। इन्हें पुलिस का संरक्षण भी मिलता है, क्योंकि पुलिस की गाड़ियां भी यहीं खड़ी होती है और पुलिस वाले भी चाय की चुस्की लेते हैं। बाजार 10 बजे तक बंद करा दिया जाता है मगर इन चाय की दुकानाें पर दो बजे तक हुड़दंग कटता है। इस पर पुलिस अधिकारियों को आपत्ति नहीं है।