पांच जांच अधिकारी बदले गए, लगा दी गई फाइनल रिपोर्ट
अशरफ के साले सद्दाम के खिलाफ गालीगलौज व आईटी एक्ट के साथ ही दो वर्गों के बीच शत्रुता फैलाने की धाराएं लगीं। 29 महीने तक एक-एक कर पांच जांच अधिकारी बदले गए, लेकिन सद्दाम को खोजा नहीं जा सका। केस के पहले विवेचक इंस्पेक्टर राकेश कुमार थे। इसके बाद जांच का जिम्मा मान सिंह को दिया गया। जब उनसे भी कुछ नहीं हो पाया तो यह दायित्व अनुपम श्रीवास्तव को दिया गया। इसके बाद राजेश कुमार मौर्य को जांच सौंपी गई।
आखिरी जांच अधिकारी वजीउल्लाह खान बनाए गए और उन्होंने ही एक फरवरी 2023 को इस मामले में अंतिम रिपाेर्ट लगा दी। तर्क दिया कि तमाम प्रयासों के बावजूद सद्दाम का पता नहीं चल सका है। अशरफ के तमाम काले कारनामों को संभालने वाले सद्दाम को आखिर पुलिस खोज कैसे नहीं पाई, इससे भी बड़ा सवाल अधिकारियों की सहमति का है। उन्होंने अंतिम रिपोर्ट को कैसे हरी झंडी दिखा दी। इस सवाल पर दो पुलिस अधिकारियों से बातचीत की गई, लेकिन उन्होंने टिप्पणी करने से साफ इन्कार कर दिया।
एक मुकदमे में लग चुकी थी चार्जशीट
सद्दाम को खोज नहीं पाने का हवाला देकर क्लीनचिट देने वाली धूमनगंज पुलिस ने दो महीने पहले ही एक मामले में इसके खिलाफ चार्जशीट भी लगा चुकी थी। तब, उसका बयान भी लिया गया था। यह मुकदमा था एक लाख के इनामी बहनोई अशरफ को संरक्षण देने और फरार होने में मदद करने का। इसकी एफआईआर आठ जून 2020 को लिखी गई थी।