एक लाख तक का आधार मूल्य है नंबरों का, बोली तक नहीं लगी
बरेली। कोरोना के दौर में वाहनों के वीवीआईपी नंबरों की पूछ खत्म हो गई। एक के बाद एक कई सीरीज में आरटीओ दफ्तर में न बिक पाने वाले ऐसे वीवीआईपी नंबरों की तादाद बढ़ती जा रही है जिनका आधार मूल्य एक लाख रुपये तक का है। मजबूरन इन नंबरों को फ्रीज करना पड़ रहा है। इससे आरटीओ दफ्तर का घाटा करोड़ों में पहुंच चुका है।
परिवहन विभाग हर सीरीज में साढ़े तीन सौ वीआईपी और वीवीआईपी नंबर जारी करता है। इनमें 0001 और 9999 जैसे नंबरों का आधार मूल्य एक लाख रुपये तक का होता है। इन्हें ऑनलाइन बोली में आवंटित किया जाता है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक करीब एक दर्जन सीरीज में चुनिंदा नंबर ही बिक पाए हैं। करीब 90 प्रतिशत वीआईपी नंबरों की कोई बोली ही नहीं लगी। लिहाजा उन्हें फ्रीज कर दिया गया। इस तरह तीन हजार से ज्यादा वीआईपी नंबर न बिक पाने से विभाग को पिछले सालों में कई करोड़ का घाटा हो चुका है। अफसरों के मुताबिक वीआईपी नंबरों की अनदेखी का सिलसिला डीए सीरीज से शुरू होकर इस समय जारी डीएफ सीरीज तक पहुंच चुका है। अब भी इन नंबरों में लोगों की दिलचस्पी बढ़ती नहीं दिख रही है। इस वजह से ये नंबर विभाग के लिए सिरदर्द बन गए हैं। (संवाद)
अब एक हजार रुपये में जन्मतिथि और भाग्यांक बुक कर रहे हैं लोग
आरआई मानवेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक अब लोग आकर्षक नंबरों के बजाय सामान्य नंबरों की बुकिंग में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। वे इन नंबरों की अपनी जन्मतिथि, शादी की तारीख और भाग्यांक के आधार पर खरीदारी कर रहे हैं। जैसे, अगर किसी की जन्मतिथि के अंकों का जोड़ नौ है तो वह ऐसे नंबर की खरीद कर रहा है जिसका जोड़ नौ बन रहा हो। चूंकि ये नंबर आकर्षक की श्रेणी में नहीं आते लिहाजा एक हजार रुपये का शुल्क चुकाकर इन नंबरों की बुकिंग बिना बोली की जा सकती है।
चार श्रेणी में बिकते हैं वीआईपी नंबर
परिवहन विभाग में वाहनों के वीआईपी नंबरों को आकर्षक, अति आकर्षक, महत्वपूर्ण और अतिमहत्वपूर्ण की श्रेणी में बांटा गया है। अलग-अलग श्रेणी का आधार मूल्य भी तय है। पसंदीदा नंबर के लिए विभागीय बेबसाइट पर ऑनलाइन बोली में हिस्सा लेना होता है। आधार मूल्य से शुरू होने वाली बोली में जो शख्स सबसे ज्यादा बोली लगाता है, उसी के नाम नंबर आवंटित कर दिया जाता है।
मांग खत्म होने के ये बड़े कारण
वीआईपी नंबरों की मांग शौक और रसूख दिखाने के लिए बढ़ी तो सरकार ने बोली प्रक्रिया शुरू करा दी। सितंबर 2019 में इनका आधार मूल्य बढ़ाया गया तो मांग में गिरावट आनी शुरू हो गई। पिछले साल कोरोना संकट के बाद लोगों ने वीआईपी नंबरों से और भी किनारा कर लिया।
एचएसआरपी (हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट) की अनिवार्यता भी वीआईपी नंबरों की मांग में भारी गिरावट आने की बड़ी वजह माना जा रहा है। दरअसल पहले लोग डिजाइन में फेरबदल कर नंबरों से प्लेट पर कई तरह के नाम लिख लेते थे। पापा लिखने के लिए 4141, दारू लिखने के लिए 4129 और नबाव लिखने के लिए 7919 नंबर खरीदे जाते थे। एचएसआरपी की अनिवार्यता के बाद यह खेल बंद हो गया।
आकर्षक नंबरों की मांग कम हुई है। कई सीरीज में अति आकर्षक, आकर्षक, महत्वपूर्ण श्रेणी के नंबर बिना बिके रह जा रहे हैं। 9999, 0001 जैसे नंबरों के लिए पहले मारामारी होती थी मगर अब बोली ही नहीं लग रही है। आकर्षक नंबरों की मांग में पिछले एक साल में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। - कमल गुप्ता, आरटीओ