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आंवला: स्थानीय मुद्दे गायब, जातिगत समीकरणों पर केंद्रित हुआ चुनाव

Sun, 21 Apr 2019 02:30 AM IST
Vikas Kumar अनूप शर्मा/सुधाकर शुक्ला, अमर उजाला, आंवला
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लोकसभा चुनाव 2019 - फोटो : फाइल फोटो
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आजादी के बाद 17 वर्ष तक रामपुर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा रहे आंवला में चुनाव पूरी तरह जातीय गणित पर केंद्रित है। 1967 में बने इस संसदीय क्षेत्र में ध्रुवीकरण की कोशिशें जोरों पर है। माना जा रहा है कि विरोधी के वोट बैंक में सेंध लगाने में जो प्रत्याशी जितना कामयाब होगा, उसकी जीत उतनी ही पक्की हो जाएगी। आंवला लोकसभा सीट में दो जिलों के पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं। आंवला, बिथरी चैनपुर व फरीदपुर बरेली जिले में, तो दातागंज व शेखूपुर बदायूं जिले में आते हैं। भाजपा ने निवर्तमान सांसद धर्मेंद्र कश्यप को फिर मैदान में उतारा है। सपा-बसपा गठबंधन से रुचिवीरा और कांग्रेस से पूर्व सांसद सर्वराज सिंह मैदान में हैं।

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कड़ी टक्कर को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और डॉ. दिनेश शर्मा की सभाएं हो चुकी हैं। गठबंधन की भी संयुक्त जनसभा हो चुकी है, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व ज्योतिरादित्य सिंधिया भी सर्वराज के प्रचार के लिए आ चुके हैं। सर्वराज दो बार सपा व एक बार जद-यू के टिकट पर आंवला से सांसद चुने गए थे। रुचिवीरा का क्षेत्र के वोटरों से पहली बार परिचय हुआ है।

सिसोना गांव के आकिल खान विकास व राष्ट्रहित को अपना मुद्दा बताते हैं तो हरदासपुर के व्यापारी अनिल महेश्वरी व्यापारी हित को। चाट का ठेला लगाने वाले अमरपाल चंद्रा को देश की सुरक्षा मजबूत होने की मुराद है। कहते हैं, सड़कें-नालियां तो बनती ही रहती हैं। नौगवां ब्रह्ननान के गंगासहाय प्रजापति और गैनी के इकरार खान किसानों के लिए किए गए वादों को तौल रहे हैं। फरीदपुर के गांव भगवंतापुर के आशिक अली गठबंधन को भाजपा का विकल्प करार देते हैं। 
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गांव नवदिया के छत्रपाल यादव बोले, हमेशा साइकिल को वोट दिया है, लेकिन इस बार सीट बसपा को दे दी गई है तो सोचना पड़ रहा है कि कहां वोट दें। परा के महेंद्रपाल कांग्रेस को आजमाना चाहते हैं। बसावनपुर के धर्मवीर कहते हैं कि पाकिस्तान को सबक सिखाने वाले मोदी से बेहतर विकल्प कोई भी नहीं है।

10 साल में 4 लाख मतदाता बढ़े
वर्ष 2009 में आंवला में 13.1 लाख मतदाता थे। वर्ष 2014 में संख्या बढ़कर 15.86 लाख जबकि 2019 में 17.70 लाख हो चुकी है।

आंवला सीट का इतिहास
1967 और 71 में कांग्रेस की सावित्री श्याम चुनी गई थीं। उन्होंने दोनों बार जनसंघ के बृजराज सिंह उर्फ आछू बाबू को हराया था। 1977 में आछू बाबू ने हिसाब चुकता कर लिया। 1980 में जनता पार्टी के जयपाल सिंह कश्यप कांग्रेस की संतोष कुमारी पाठक को हराकर सांसद बने। 1984 में कांग्रेस के कल्याण सिंह सोलंकी ने जयपाल सिंह कश्यप को हराकर सीट जीती थी। 1989 से 2006 तक आंवला का चुनाव कुंवर सर्वराज सिंह और राजवीर सिंह के इर्द-गिर्द घूमता रहा। 1989 में राजवीर सिंह ने निर्दलीय जयपाल सिंह कश्यप को हराया। 1991 में राजवीर ने कांग्रेस की रमा कश्यप को हराया। 1996 में सपा के सर्वराज जीते। 1998 में राजवीर ने सपा के सर्वराज को फिर हरा दिया। 1999 व 2004 में सर्वराज चुने गए। 2009 में भाजपा से मेनका गांधी चुनी गई थीं और 2014 में भाजपा के धर्मेंद्र कश्यप चुनाव जीते।
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2009 लोस चुनाव परिणाम
प्रत्याशी                           वोट

मेनका गांधी (भाजपा)      216503
धर्मेंद्र कश्यप (सपा)       208822
सर्वराज सिंह (बसपा)      174353
महबूब खां (महान दल)    56233

2014 लोस चुनाव परिणाम
प्रत्याशी                           वोट

धर्मेंद्र कश्यप (भाजपा)     409907
सर्वराज सिंह (सपा)         271478
सुनीता शाक्य(बसपा)      190200
सलीम शेरवानी (कांग्रेस)   93861


वोटरों का जातीय गणित
मुस्लिम     3.5 लाख
एससी     3.5 लाख
क्षत्रिय    2.25 लाख
कश्यप     .50 लाख
यादव     1.75 लाख
ब्राह्मण     1.50 लाख
वैश्य     1.00 लाख
मौर्य शाक्य 1.00 लाख
अन्य     1.70 लाख
कुल     17.70 लाख

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