परियोजना निदेशक ने कहा कि नए सिरे से चल रहा है काम
बरेली। बरेली-सीतापुर हाइवे की अधिकतर लाइटें खराब है। बारिश में रात में हाइवे से निकलने वाले लोगों की समस्याएं और बढ़ गई हैं। कुछ एक्सीडेंट स्पॉट पर हाईमास्ट लाइटें भी लगाई गई थी लेकिन वह आज तक नहीं जली।
बरेली-सीतापुर हाइवे पर लोगों से टोल तो वसूला जा रहा है लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें कुछ नहीं मिल रहा है। हाइवे पर बेशुमार गड्ढे हैं। सड़क किनारे जो टेलीफोन सुविधा दी गई थी। वह भी खराब है और खास बात यह है कि टोल के आगे पीछे या हाइवे के कट पर लाइटें नहीं लगी है। बारिश में राहगीरों की दिक्कतें और अधिक बढ़ गई हैं। एनएचआई परियोजना निदेशक अमित रंजन चित्रांशी ने बताया कि हाइवे पर जिस कंपनी को काम दिया गया था। वह बीच में ही अधूरा काम छोड़कर भाग गई थी। उसके बाद नए सिरे से काम किया किया जा रहा है। हाइवे पर जो गड्ढे हैं, उन्हें चिह्नित किया गया और उन्हें भरा जा रहा है। इसके बाद टेलीफोन और लाइटें भी ठीक कराई जाएगी। इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
‘हाइवे पर हादसों को रोकने के लिए इन इंतजाम को होना जरूरी है। एनएचआई की ओर से ये इंतजाम किए भी जाते हैं लेकिन बरेली-सीतापुर हाइवे पर यह इंतजाम अधूरे पड़े हैं।’ - अमित रंजन चित्रांशी, परियोजना निदेशक
ये सुविधाएं होनी चाहिए हाईवे पर
- सड़क किनारे सफेद रंग की रेडियम पट्टी लगाना।
- लाल रंग की रंबल स्ट्रिप और ट्रक ले बाई का निर्माण।
- सड़क पर यू टर्न, दुर्घटना बहुल क्षेत्र आदि का संकेतक।
- हाईवे से सटे बाजार या कस्बा में फु ट ओवरब्रिज का निर्माण।
- हाईवे से सटे बाजार, कस्बा में दूसरी तरफ जाने के लिए सर्विस रोड।
- हाईवे से सटे बाजार या कस्बा के अलावा लिंक रोड पर जाने के लिए अंडर पास।
- सेफ्टी ग्रिल, साइन बोर्ड, सोडियम लाइट के साथ चौराहों पर हाईमास्ट लाइट की व्यवस्था।