बरेली के फरीदपुर थाना क्षेत्र में 20 मई 2003 में ग्रामीण की हत्या कर दी गई थी। उसका शव गन्ने के खेत में मिला था। मृतक के भाई ने मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में शुक्रवार को कोर्ट ने दोषी अभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाई। उस पर 15 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया।
बरेली में ग्रामीण को घर से बुलाकर उसकी हत्या करने और शव गन्ने के खेत में छिपाने के दोषी को अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या सात अभिषेक कुमार चतुर्वेदी ने उम्रकैद और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। मामले में दो अन्य अभियुक्तों की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई।
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फरीदपुर थाना क्षेत्र के गांव नवादा बिलसंडी निवासी सोनपाल ने 21 मई 2003 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके सगे भाई महेंद्र को गांव का चरन सिंह उर्फ चौधरी, खल्लापुर निवासी कन्हई और गुलाबनगर का मोती 20 मई की रात 11 बजे घर से बुलाकर ले गए थे। तीनों का उसके भाई से मेल-जोल था, लेकिन पांच-छह महीने से महेंद्र ने उनका साथ छोड़ दिया था। इस कारण वे महेंद्र से रंजिश रखते थे। तीनों ने मिलकर महेंद्र की हत्या कर दी और शव रामपाल के गन्ने के खेत में फेंक दिया था।
जांच के बाद पुलिस ने अगस्त 2003 में चार्जशीट दाखिल कर दी। मामले की सुनवाई के दौरान अप्रैल 2022 में चरन सिंह उर्फ चौधरी और अगस्त 2024 में मोदी की मौत हो गई। कन्हई के खिलाफ सुनवाई जारी रही। दोनों पक्षों के वकीलों व गवाहों को सुनने और साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने कन्हई को महेंद्र की हत्या का दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।