सड़क दुर्घटना में घायल मुरादाबाद जिले के बिलारी विधायक हाजी इरफान की एंबुलेंस में हुई मौत सेहत महकमे को सवालों के घेरे में ले आई थी। उच्च स्तरीय जांच कमेटी ने बदायूं जिला अस्पताल के डॉक्टरों और स्टॉफ को दोषमुक्त तो कर दिया लेकिन रिपोर्ट में इतना जरूर कहा कि नियम तो नहीं था लेकिन अगर सीएमएस डॉ. शशि कुमार अग्निहोत्री चाहते तो वह एंबुलेंस के साथ एक डॉक्टर भेज सकते थे लेकिन विवेक का इस्तेमाल नहीं किया गया। जिसके लिए राज्यपाल के आदेश पर उनकी चरित्र पंजिका में निंदा दर्ज की जाएगी। प्रमुख सचिव ने कहा है कि वीआईपी या जनहित में एंबुलेंस में डाक्टर भेज सकते हैं।
विधायक की मौत के बाद दो सदस्यीय टीम ने मामले की जांच की। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अरविंद कुमार की ओर से जो कार्यालय आदेश जांच रिपोर्ट के बाद जारी किया गया है उसमें कहा गया है कि प्रभारी सीएमएस के साथ अन्य चिकित्साधिकारियाें की लापरवाही की पुष्टि नहीं हुई है। प्रमुख सचिव ने कहा कि प्रशासनिक दृष्टिकोण से वीआईपी व्यक्ति या जनहित में एंबुलेंस में एक चिकित्सक भेज सकते हैं। हालांकि इस सूझबूझ का परिचय नहीं दिया गया।
शादी में जाते समय हुआ था हादसा
कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव के बेटे की शादी में शामिल होने के लिए विधायक हाजी इरफान इटावा जा रहे थे। 10 मार्च 2016 को बदायूं में सड़क दुर्घटना हुई, जिसमें घायल होने के बाद विधायक को सीएचसी उझानी से जिला अस्पताल ले गये, लेकिन हालत गंभीर होने पर उन्हें एंबुलेंस से बरेली रिफर किया गया। रास्ते में विधायक का निधन हो गया। उपचार में ढिलाई के आरोप लगे तो डीजी हेल्थ द्वारा दो सदस्यीय टीम गठित की गई थी। एंबुलेंस में खामियों की बात भी उठी थी।
‘शासन ने भी मानवता के नाते यह कहा है कि संवेदनशील और वीआईपी मामले में एंबुलेंस में चिकित्सक भेजें तो दिक्कत नहीं है।’
डॉ. सुबोध शर्मा, जेडी हेल्थ, बरेली मंडल