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भूमि अधिग्रहण घोटाला: प्रॉपर्टी डीलरों के हाथ बिकता रहा हाईवे का एलाइनमेंट, बाद में आए पेशेवर खरीदार

Fri, 27 Sep 2024 01:54 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली-सितारगंज हाईवे चौड़ीकरण के लिए हुए भूमि अधिग्रहण में अफसरों की मिलीभगत से प्रॉपर्टी डीलरों ने खेल किया। हाईवे के एलाइनमेंट का सौदा किया गया। इसके बाद पेशेवर खरीदार सक्रिय हुए। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली-सितारगंज हाईवे के भूमि अधिग्रहण घोटाले में पेशेवरों के शामिल होने की बात जांच में पुष्ट हो गई है। सूत्रों की माने तो हाईवे का एलाइनमेंट एक प्रॉपर्टी डीलर के हाथ लग गया था। उसने दूसरे प्रॉपर्टी डीलरों से इसका सौदा कर लिया। पेशेवर खरीदार तो बाद में इस खेल में शामिल हुए। अब इसके खुलासे के लिए कड़ियां जोड़ने की जरूरत है। शासन ने एसआईटी से इस मामले की जांच कराने के आदेश दिए हैं। उम्मीद है कि इसमें अफसरों, दलालों, प्रॉपर्टी डीलरों आदि का गठजोड़ खुलकर सामने आएगा।

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प्रॉपर्टी डीलरों ने एलाइनमेंट का सौदा शुरू किया तो पेशेवर खरीदार भी सक्रिय हो गए। गांव के किसान जो वर्षों से उस जमीन के मालिक थे, थोड़े से लालच में वे अपना बड़ा नुकसान कर बैठे। पेशेवरों ने उनकी जमीन खरीद ली। मुआवजा लेने का समय आया तो किसान सिर्फ देखते रहे, जबकि गठजोड़ में शामिल लोग रातोंरात करोड़पति बन गए। अब किसके जरिये उन्हें एलाइनमेंट की जानकारी मिली, यह विस्तृत जांच में सामने आएगा।

एनएचएआई के स्थानांतरित परियोजना निदेशक भी कार्रवाई के घेरे में एनएचएआई के परियोजना निदेशक बीपी पाठक और तत्कालीन क्षेत्रीय अधिकारी संजीव कुमार शर्मा 23 अगस्त को निलंबित किए जा चुके हैं। 

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एआर चित्रांशी पर भी लटकी कार्रवाई की तलवार 
अब कमिश्नर की जांच रिपोर्ट में दूसरे परियोजना निदेशक एआर चित्रांशी का नाम सामने आया है। वे भी कार्रवाई के घेरे में आ सकते हैं, क्योंकि कमिश्नर की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में उन्हें अधिग्रहण की अधिसूचना के बारे में तहसील स्तर पर जानकारी न देने के लिए उत्तरदायी माना गया है। साथ ही, उनकी भूमिका को संदिग्ध करार दिया गया है। बताते हैं कि चित्रांशी मुख्यालय के लिए स्थानांतरित हो चुके हैं। अगर जांच रिपोर्ट एनएचएआई चेयरमैन तक पहुंचती है तो कार्रवाई आगे बढ़ेगी।

विस्तृत जांच में खुलेंगी घोटाले की और परतें
अब तक हुईं तीन जांचों में 50 लाख से अधिक मूल्यांकन वाले चंद मामलों के परीक्षण में ही 80 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला सामने आया है। अब अगर 50 लाख रुपये से कम मुआवजे वाले मामलों की जांच होती है तो नए घोटाले भी सामने आ सकते हैं।
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विस्तृत जांच से मिलेंगे इन सवालों के जवाब
  • अधिकारियों और दलालों के बीच किस तरह का गठजोड़ रहा?
  • ये गठजोड़ कैसे बना और हेराफेरी के लिए किसने क्या तरीका अपनाया? 
  • अधिक मुआवजा हासिल करने के लिए बाहर से आकर हाईवे या रिंग रोड के अधिग्रहीत क्षेत्र में जमीन खरीदने वाले लोगों का अधिकारियों से क्या संबंध है? 
  • अब तक हुईं तीन जांचों में अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से एलाइनमेंट लीक होने की आशंका जताई गई है। इसलिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि गोपनीय जानकारी क्यों और किसने लीक की? 
  • एलाइनमेंट लीक करने के बदले में संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को क्या मिला? 
  • किसके कार्यकाल में जानकारी लीक हुई?
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