गलत भू उपयोग में 28 लोगों के नाम आए सामने
अधिकारियों -दलालों से सांठगांठ कर अधिक मुआवजा पाने के लिए परियोजना के आसपास जमीन खरीदने और उसे अकृषक घोषित करवाकर निर्माण भी दिखाने के मामलों में अब तक 28 लोगों के नाम सामने आए हैं। इसमें नौ मामले जिला प्रशासन की जांच में खुले है, जिनमें छह नवाबगंज तहसील व तीन सदर तहसील के हैं। वहीं 19 लोगों के नाम पीलीभीत में गलत ढंग से जमीन खरीदने में अब सामने आए हैं।
2021 में जहां हो रही थी खेती, वहां दिखाए पुराने निर्माण
जांच में सामने आया है कि जहां मार्च 2021 में खेती हो रही थी, वहां सरकारी विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों व सर्वे एजेंसी ने निर्माण दिखा दिए। समिति के अनुसार एनएचएआई की ओर से उपलब्ध कराये गए ड्रोन सर्वे, सेटेलाइट इमेज डाटा से स्पष्ट है कि उक्त भूखंडों को खरीदने के बाद उन पर निर्माण कराया गया है। वहीं, मूल्यांकन रिपोर्ट में गवर्नमेंट अप्रूव्ड वैल्युअर एसए इंफ्रास्ट्रक्चर कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड, एनएचएआई परियोजना कार्यान्वयन इकाई बरेली व लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता/अधिशासी अभियंता ने परिसंपत्तियों के निर्माण की अवधि दो से लेकर सात वर्ष तक अंकित की है।
साथ ही सर्वे रिपोर्ट में एसए इंफ्रास्ट्रक्चर कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड, एनएचएआई परियोजना कार्यान्वयन इकाई बरेली, क्षेत्रीय लेखपाल व भू अर्जन अमीन ने स्थल पर पूर्ण निर्माण की रिपोर्ट प्रस्तुत की है। समिति के अनुसार इससे स्पष्ट है कि परिसंपत्तियों की सर्वे व मूल्यांकन रिपोर्ट गड़बड़ है। मौके पर स्थित स्ट्रक्चर से अधिक का मूल्यांकन किया गया। इससे यह भी स्पष्ट है कि उक्त परिसंपत्तियों के प्रतिकर का भुगतान अवैध तरीके से किया गया, जो कि नियमानुसार योग्य नहीं था।
संबंधित विभागों को भेजेंगे पत्र, तय होगी अफसरों की जिम्मेदारी
जांच अधिकारी अपर आयुक्त प्रशासन प्रीति जायसवाल के मुताबिक जांच अभी थमी नहीं है। भू उपयोग में बदलाव से जुड़े कई सवालों के जवाब अभी बाकी हैं। भूमि अधिग्रहण और मूल्यांकन के दौरान राजस्व विभाग, सक्षम अधिकारी, कन्सल्टेंट फर्म, एनएचएआई के तत्कालीन अफसरों, कर्मचारियों की जानकारी जुटाई जाएगी। प्रपत्रों पर सिर्फ उनके हस्ताक्षर हैं, नाम नहीं। तकनीकी स्तर से भी जांच की सिफारिश की गई है। इसके बाद ही संबंधित की जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
धारा-80 के बाद भी कृषि भूमि का दिया मुआवजा, पहुंचे कोर्ट
विभागीय सूत्रों के मुताबिक ज्यादा मुआवजा हासिल करने के लिए कई किसानों ने भू उपयोग में परिवर्तन कराया, पर उन्हें मुआवजा कृषि भूमि का दे दिया गया। लिहाजा, कई किसानों ने वाद दायर किया है। कमोबेश यही स्थिति जांच के दौरान भी रही। इस सुनियोजित खेल में कौन दोषी होगा, यह तय करना मुश्किल है। अगर पुख्ता सुबूत के अभाव में उन्हें दोषी माना गया तो वे हाईकोर्ट जा सकते हैं।
आठ गाटा संख्या में नोटिफिकेशन के बाद भू उपयोग में हुआ बदलाव
जांच में पाया गया कि एनएच एक्ट के तहत हाईवे के नोटिफिकेशन के बाद आठ गाटा संख्या के भू उपयोग में बदलाव किया गया। इनमें अमरिया में गाटा संख्या-84, 86, हेतमडांडी में गाटा संख्या 125, सरदार नगर में गाटा संख्या-32, 41, 206, मुड़लिया गौसू व भैसहा में गाटा संख्या-211, 213 शामिल हैं।
नाै गांवों में 50 लाख से अधिक मुआवजे के 20 मामले मिले : 27 गांव के 735 गाटों में 3,457 किसानों/लाभार्थियों की भूमि, परिसंपत्तियों का अधिग्रहण किया गया है। इनमें 50 लाख रुपये से अधिक प्रतिकर भुगतान वाले मामलों की विशेष जांच की गई है। नौ गांवों में ऐसे 20 प्रकरण पाए गए।
पीलीभीत के 27 गांवों की हुई जांच : जांच समिति ने बरेली-सितारगंज हाईवे के पैकेज एक के कुकरी खेड़ा, विलई पसियापुर, उगनपुर, हंडा, देवीपुरा व शाही और पैकेज दो के बढेपुरा, हुसैननगर, मुड़लिया गौसू, धुंधरी, कल्यानपुर चक्रतीर्थ, बल्लिया, दबका, विलहरा माफी, भौनी, कैचूटांडा, माधौपुर, मुड़लिया इलाहीबक्श, लाहौरगंज, भौना, भैसहा, अमरिया, हेतमडांडी, सरदारनगर, बारात बोझ, सहगवां नगरिया, कटमती गांवों के भू अधिग्रहण की जांच की।