बरेली। सामाजिक सरोकारों से अपने जुड़ाव का सिलसिला जारी रखते हुए अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से इस साल भी राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान रक्तदान दिवस पर अमर उजाला परिसर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया जिसमें 39 महादानियों ने रक्तदान किया। इन महादानियों को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
अमर उजाला परिसर में जिला अस्पताल के साथ संयुक्त रूप से आयोजित शिविर में सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक रक्तदान का सिलसिला जारी रहा। दूसरों की जिंदगी का जज्बा मन में लिए कई ऐसे लोग भी शिविर में पहुंचे जो वजन कम होने और हीमोग्लोबिन कम होने की वजह से रक्तदान नहीं कर सके। 101 बार रक्तदान कर कीर्तिमान बना चुके समाजसेवी इकबाल सिंह बाले भी कुछ लोगों के साथ रक्तदान करने पहुंचे। महिला जागृति मंच की अध्यक्ष मनु नीरज के भी साथ आकर कई महिलाओं और युवाओं ने रक्तदान किया। शिविर में जिला अस्पताल की ओर से डॉ. सूरज पांडेय, स्टाफ नर्स शालिनी, जगदीश रामपाल, मनोज कुमार, शिवकुमार, ज्योति, आशा, रवि संजय ने टीम के साथ सहयोग किया।
पहली बार रक्तदान करने आए कई युवा
शिविर में अपार अग्रवाल, अमन कश्यप और अभिषेक अग्रवाल ने पहली बार रक्तदान किया। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें डर लग रहा था लेकिन जब बड़ी सहजता से रक्तदान हुआ तो उन्हें अच्छा लगा। उनका रक्त किसी के काम आ सकेगा, इस बात की भी उन्हें काफी खुशी है। युवाओं ने कहा कि आगे भी वह अमर उजाला फाउंडेशन के कैंप में रक्तदान करना जारी रखेंगे।
नेशनल बॉक्सर नंदिनी ने भी किया रक्तदान
नेशनल बॉक्सर नंदिनी ने भी रक्तदान किया। उन्होंने बताया कि वह पहले भी एक बार रक्तदान कर चुकी हैं। बोलीं, अमर उजाला में रक्तदान शिविर की खबर पढ़ी तो रक्तदान करने चली आईं।
हीमोग्लोबिन बढ़ाकर किया रक्तदान
जनकपुरी के दंपती मनोज सक्सेना व रचना सक्सेना ने एक साथ रक्तदान किया। मनोज 11 बार रक्तदान कर चुके हैं लेकिन रचना के लिए यह पहला मौका था। रचना ने बताया कि वह तीन साल से अमर उजाला कैंप में रक्तदान करने के लिए आ रही हैं लेकिन तीनों बार हीमोग्लोबिन कम होने से रक्तदान नहीं कर पाईं। इस बार उन्होंने ठान लिया कि रक्तदान करना ही है। इसलिए एक महीने पहले से डॉक्टर की सलाह पर फलों का सेवन शुरू कर दिया था। हीमोग्लोबिन का लेवल सही हो गया, उन्हें खुशी है कि वह रक्तदान कर सकीं।
अमर उजाला से मिली रक्तदान की प्रेरणा
भरत मूलचंदानी ने पहली बार 15 अप्रैल 2008 को अमर उजाला फाउंडेशन शिविर से प्रेरित होकर रक्तदान किया था और तब से लगातार रक्तदान कर रहे हैं। अब तक 38 बार रक्तदान कर चुके हैं। 55 वर्षीय रवींद्र भी 88 बार रक्तदान कर चुके हैं। सिविल लाइंस के 65 वर्षीय राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल अमर उजाला कैंप में लगातार रक्तदान करते आ रहे हैं। इस बार में उन्होंने 62वीं बार रक्तदान किया है।
रक्तदान नहीं कर सकीं तो हौसला बढ़ाया
राष्ट्रीय सेवा योजना की छात्रा प्रिया मिश्रा, दीपमाला, रेनु और अदिति दीक्षित रक्तदान करने पहुंची लेकिन वजन और हीमोग्लोबिन कम होने के कारण रक्तदान नहीं कर सकीं। लेफ्टिनेंट बीनम सक्सेना भी कई एनसीसी कैडेट भी इसी वजह से महादान में हिस्सा नहीं ले सकीं। ये लोग कैंप में रुककर रक्तदान करने आए दूसरे लोगों का हौसला बढ़ाते रहे।