एलआईसी ने जारी किया था नोटिस
अमित मिश्रा ने बताया कि कैनविज को एलआईसी ने बीमा बेचने के लिए अधिकृत नहीं किया था। बावजूद इसके कंपनी का लोगो व नाम इस्तेमाल करने की जानकारी पर एलआईसी के बरेली मंडल कार्यालय की ओर से 22 मार्च 2016 को पत्र जारी किया गया। कैनविज के कार्यकारी निदेशक से बिना अनुमति एलआईसी के रजिस्टर्ड लोगो के इस्तेमाल पर सात दिनों में जवाब तलब किया गया था।
यह भी पढ़ें- दुल्हन ने किया शादी से इनकार: बरेली में 15 घंटे हिरासत में रहा दूल्हा, नींद की झपकी के कारण टूटा रिश्ता
जवाब न देने पर 10 मई 2016 को फिर रिमांइडर दिया गया। प्रकरण के लिए अधिकृत अधिकारी वीके थपरियाल (प्रबंधक विक्रय) को नियुक्त किया गया। तब कैनविज कंपनी ने अपनी वेबसाइट व प्रचार सामग्री से एलआईसी का लोगो हटा लिया था। हालांकि एलआईसी अधिकारियों ने मामले में कानूनी कार्रवाई नहीं की, जिसे लेकर आज तक सवाल उठ रहे हैं।
करोड़पति बनाने का दिखाते थे सपना
गुलाटी की कैनविज कंपनी लोगों को 22 महीने तक रकम जमा करने पर हर महीने पांच फीसदी ब्याज देने का झांसा देती थी। फिर 22 महीने बाद उन्हें उनका मूलधन ज्यों का त्यों लौटाने का दावा किया जाता था। शुरू में गुलाटी के एजेंट प्रतिमाह लोगों को यह रकम देते थे, बाद में एजेंटों के जरिये भी गड़बड़ी शुरू हो गई। कंपनी महंगे होटलों में भव्य सेमिनार करके बेरोजगार युवाओं को मल्टी लेवल मार्केटिंग के लाभ बताकर जोड़ती थी।
संबंधित खबर- UP News: बरेली में महाठग कन्हैया गुलाटी के खिलाफ दो और रिपोर्ट, पत्नी-बेटा समेत 20 लोग नामजद
वह अपने नीचे सदस्य बनाते थे तो आकर्षक कमीशन मिलता था। कुछ खास लोगों को महंगी कार भी दी जाती थी। एलआईसी की पॉलिसी खरीदकर कैनविज का सदस्य बनने के लिए इच्छुक शख्स को 25 हजार रुपये खर्च करने पड़ते थे। कंपनी से जुड़ने के लिए लिस्ट में शामिल अन्य उत्पादों की कीमत इससे बेहद कम थी। इसी झांसे में लोग कंपनी के उत्पादों पर भरोसा करके निवेश कर देते थे।
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि कैनविज मामले में कन्हैया गुलाटी व उसके साथियों पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। जल्दी ही एसआईटी उससे संबंधित पत्रावली व विवेचनाएं ग्रहण कर तफ्तीश व तलाश शुरू कर देगी।