दूसरे मामले में नवादा शेखान की नुसरत ने बताया कि उनका 250.83 वर्गमीटर का भूखंड नवादा शेखान में है। इस पर चकबंदी लेखपाल सावन कुमार जायसवाल, दीपक कुमार और सुनील कुमार कब्जा करना चाह रहे हैं। अदालत ने इन लोगों को व्यवधान डालने से रोकने के आदेश दिए हैं। इसके बाद भी वे निर्माण रोक रहे हैं। एसपी सिटी के निर्देश पर बारादरी थाने में दोनों मामलों की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
गिरोह में प्रॉपर्टी डीलर और महिलाएं भी
पुलिस की जांच में सामने आया है कि निलंबित चकबंदी लेखपाल सावन के भूमाफिया गिरोह में प्रॉपर्टी डीलर और अनुसूचित जाति की कुछ महिलाएं भी शामिल हैं। ये गिरोह ऐसी महंगी जमीन तलाश करता है, जिनके मालिकों की मौत हो चुकी हो। फिर ये लोग ठेले-खोमचे वाले सामान्य लोगों को उसका वारिस बनाकर खड़ा कर देते हैं। जरूरत के हिसाब से लेखपाल फर्जी वारिसान तैयार कराने में मदद करता है। कई बार ये लोग संबंधित थाना पुलिस से भी सेटिंग कर लेते हैं और पुलिस को मौके पर बुलाकर फर्जी मुकदमा तक लिखवा देते हैं।
एक महिला ने किए पांच बैनामे, गवाह और क्रेता भी समान
पुलिस के मुताबिक लेखपाल के साथी अपनी ओर से वारिस खड़ा करके मामूली दाम पर इन भूखंडों के सौदे अपने ही दूसरे साथियों के नाम करा देते हैं। जमीन के असली मालिक को जब तक हकीकत का पता लगता है, वह तीसरा पक्ष बनकर रह जाता है। असली मालिक कोर्ट के चक्कर लगाते रहते हैं और भूमाफिया गिरोह पुलिस व प्रशासन की मदद से जमीन पर कब्जा पा जाता है। ऐसी ही एक महिला को पुलिस ने ट्रेस किया है, जिसने जमीन से कोई मतलब न होने के बाद भी पांच बैनामे कर दिए। जमीन खरीदने वाला शख्स किसी दूसरे मुकदमे में गवाह होता है।
एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि निलंबित चकबंदी लेखपाल की मदद से भूमाफिया गिरोह ने कई संपत्तियों पर कब्जा किया है। गिरोह के बारे में जानकारी मिली है। कई और मामले सामने आ सकते हैं। प्रशासन की मदद से गिरोह पर कार्रवाई की जाएगी। जिन पुलिसकर्मियों की संलिप्तता मिलेगी, उन पर भी कार्रवाई होगी।