गोरक्षक विनोद राठौर ने बताया कि प्रदेश सरकार भले ही गायों के संरक्षण के लिए तमाम सुविधाओं और संसाधनों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर बहुत बुरा हाल है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उदासीनता से सरकार की योजनाएं परवान नहीं चढ़ पा रही हैं।
पशु अस्पताल की डॉक्टर खुशबू सिंह ने बताया कि घायल गाय का उपचार करा दिया है। हमें नहीं पता कि किसने फोन किया था। यह मेरा व्यक्तिगत नंबर है, किसी को भी ब्लैकलिस्ट में डाल सकती हूं। गाय को हरियाणा भेजे जाने की जानकारी नहीं है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मेघश्याम ने कहा कि 1962 एंबुलेंस सेवा केवल पालतू पशुओं के लिए है। रात में पशुओं के उपचार के लिए मेरे पास कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पतालों में सिर्फ दिन में ही ओपीडी संचालित होती है। आईवीआरआई में ही मेजर ट्रीटमेंट की व्यवस्था है।