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UP: बेजुबान को उपचार नहीं दे सकी पंगु व्यवस्था, बरेली से घायल गाय को ले गई हरियाणा की एंबुलेंस

Tue, 24 Oct 2023 08:16 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

उत्तर प्रदेश के बरेली में हादसे में घायल हुई गाय को उपचार नहीं मिल सका। इस पर गोरक्षक ने हरियाणा के झज्जर पशु चिकित्सालय से संपर्क किया। वहां एंबुलेंस बरेली आई और घायल गाय को ले गई। 
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घायल गाय को ले गई झज्जर पशु चिकित्सालय की एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी सरकार की ओर से तमाम योजनाएं संचालित के बावजूद हादसे में घायल एक गाय को स्थानीय स्तर पर उपचार नहीं मिला। गाय को बचाने के लिए गोरक्षकों ने गुहार लगाई, लेकिन गूंगी-बहरी व्यवस्था में वह भी दबकर रह गई। थक-हारकर गोरक्षकों ने हरियाणा के झज्जर स्थित गो चिकित्सालय में संपर्क किया तो वहां से एंबुलेंस आई और गाय को उपचार के लिए ले गई।
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बरेली के फतेहगंज पूर्वी में नेशनल हाईवे पर स्थित उचसिया मोड़ से पहले रविवार रात गाय और उसके बछड़े को किसी वाहन ने टक्कर मार दी। हादसे में बछड़ा मर गया और गाय घायल हो गई। गाय के इलाज के लिए स्थानीय लोगों ने गोरक्षकों को सूचना दी। गोरक्षकों का आरोप है कि फतेहगंज पूर्वी के पशु अस्पताल की डॉक्टर को बताया तो उन्होंने एक बार बात करने के बाद उनका मोबाइल नंबर ब्लैक लिस्ट में डाल दिया।

पशु चिकित्सक ने झाड़ा पल्ला
इसके बाद गोरक्षक पवन प्रजापति ने प्रदेश सरकार की ओर से संचालित पशु चिकित्सा एंबुलेंस सेवा के नंबर 1962 पर संपर्क किया। उधर से यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि यह सेवा सिर्फ पालतू पशुओं के इलाज के लिए है। रातभर गाय तड़पती रही। सोमवार सुबह गोरक्षकों ने हरियाणा के झज्जर स्थित गो-चिकित्सालय से संपर्क साधा। शाम चार बजे हरियाणा की एंबुलेंस यहां आई और गाय को ले गई।
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गोरक्षक विनोद राठौर ने बताया कि प्रदेश सरकार भले ही गायों के संरक्षण के लिए तमाम सुविधाओं और संसाधनों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर बहुत बुरा हाल है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उदासीनता से सरकार की योजनाएं परवान नहीं चढ़ पा रही हैं।

पशु अस्पताल की डॉक्टर खुशबू सिंह ने बताया कि घायल गाय का उपचार करा दिया है। हमें नहीं पता कि किसने फोन किया था। यह मेरा व्यक्तिगत नंबर है, किसी को भी ब्लैकलिस्ट में डाल सकती हूं। गाय को हरियाणा भेजे जाने की जानकारी नहीं है। 

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मेघश्याम ने कहा कि 1962 एंबुलेंस सेवा केवल पालतू पशुओं के लिए है। रात में पशुओं के उपचार के लिए मेरे पास कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पतालों में सिर्फ दिन में ही ओपीडी संचालित होती है। आईवीआरआई में ही मेजर ट्रीटमेंट की व्यवस्था है।
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