आनंद आश्रम में चल हरे वार्षिकोत्सव का समापन, बांटी गई दमे की दवा
बरेली। आनंद आश्रम में चल रहे 66वें वार्षिकोत्सव एवं संत सम्मेलन का सोमवार को समापन हो गया। अंतिम दिन दूसरे शहरों से आए संतों के प्रवचन सुनकर भक्त निहाल हो गए। समिति के मंत्री अनिल अग्रवाल ने बताया कि दमा की दवा का निशुल्क वितरण आश्रम में किया गया।
कनखल से आए महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि पारिवारिक जीवन में आपसी तनातनी से बचना चाहिए। भगवान की पूजा, भक्ति में अधिक समय देने से जीवन का उद्धार होता है। भगवान की कृपा से मिले जीवन को आपसी प्रेम बनाकर जीना चाहिए। रायबरेली से आए स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती महाराज ने महाभारत का प्रसंग सुनाते हुए कहा व्यक्ति को अभिमान से मुक्त रहना चाहिए, दुर्योधन ने भगवान कृष्ण की नारायणी सेना मांगी जबकि अर्जुन ने भगवान कृष्ण को साथ रहने का आग्रह किया, अर्जुन को पता था कि जिधर भगवान कृष्ण हैं उधर ही धर्म है, वहीं विजयी है। दुर्योधन अपने घमंड के कारण पराजित हुआ। स्वामी विज्ञानानंद महाराज ने कहा हमें खुद से यह पूछना चाहिए कि मानव जीवन की सार्थकता के लिए हम क्या प्रयत्न कर रहे हैं। शाम के सत्र में हरिद्वार से आए स्वामी विवेकानंद सरस्वती महाराज ने भारतीयता की पहचान बताते हुए बताया हम भारतीय गर्व से कह सकते हैं कि जहां हर गली व घर में धर्म पताका फहराते मिले, राम, कृष्ण के भजन सुनाई दे तो समझ लेना चाहिए कि यह जगह भारत है और यही भारतीयता की पहचान है। इस दौरान सांसद छत्रपाल गंगवार, कैंट विधायक संजीव अग्रवाल, पंकज अग्रवाल, प्रेम शंकर अग्रवाल, मोहन गुप्ता, गिरीश अग्रवाल, दीपेश खंडेलवाल, नर सिंह मोदी, अनिल गुप्ता आदि मौजूद रहे। संवाद