बरेली। रुविवि में चल रही ग्रेपलिंग प्रतियोगिता में मेजबान टीम के खिलाड़ियों का दबदबा है। अलग- अलग भार वर्गों में भाग लेते हुए इन खिलाड़ियों ने अब तक कई पदक जीते हैं। इससे उन्होंने विश्वविद्यालय के साथ-साथ शहर का भी नाम रोशन किया है।
पांच दिवसीय प्रतियोगिता में देशभर के 123 विश्वविद्यालयों की टीमें इसमें भाग ले रही हैं। विश्वविद्यालय के खिलाड़ी शिवम दिवाकर ने 46 किलो भारवर्ग ग्रेपलिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। शिवम के पिता पहलवान थे। उनसे प्रेरणा लेकर उन्होंने कुश्ती में कदम रखा। कोच ने जब शिवम के दांव-पेंच और तकनीकी कौशल को परखा, तो उन्हें ग्रेपलिंग आजमाने की सलाह दी। ऐसे ही विजयवीर यादव ने सेम्बो और जूडो में अपनी प्रतिभा साबित की और ग्रेपलिंग में पदक जीता है। उन्होंने दो खेलों में ख्याति अर्जित करने के बाद ग्रेपलिंग में हाथ आजमाया। लगातार मेहनत और समर्पण के बल पर विजयवीर ने ग्रेपलिंग की 54 किलो भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीता है।
खेतों में अभ्यास कर ग्रेपलिंग में हासिल कर रहे ख्याति
दो भाई दीक्षांत और दिग्विजय चौधरी ने अपने पिता को पहलवानी करते देखा तो कुश्ती लड़ने लगे। उन्होंने खेतों में ही अभ्यास शुरू कर दिया। नियमित मेहनत और लगन के चलते उनकी कुश्ती में पकड़ मजबूत होती गई। स्टेडियम में प्रशिक्षण के दौरान उनके कोच ने उन्हें ग्रेपलिंग से अवगत कराया और इस खेल को अपनाने की सलाह दी। दोनों भाइयों ने इसे गंभीरता से लिया और नए दांव-पेंच सीखने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कड़ी मेहनत और तकनीकी सुधार के दम पर दोनों भाइयों ने रुविवि में हो रही अपनी पहली ही ग्रेपलिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर उपलब्धि हासिल की। संवाद