गैंगस्टर, गुंडा एक्ट, रासुका न लगाने पर सवाल
कोर्ट ने 22 जून 2024 को पीलीभीत बाइपास पर हुए गोलीकांड में आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर, गुंडा एक्ट, रासुका न लगाने पर भी सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि इससे दोनों पक्षों की पहुंच का अंदाजा लगाया जा सकता है। मात्र तत्कालीन इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया।
किसी बड़े अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। दो पक्षों के बीच सरेराह 100 राउंड फायरिंग की गई। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इससे कानून-व्यवस्था की पोल खुल गई थी। दोनों पक्षों के राजनीतिक आकाओं के खिलाफ पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
शेरू का गुर्गा है ललित, गैंगवार से बनाई धमक
इज्जतनगर के मठ लक्ष्मीपुर का रहने वाला हिस्ट्रीशीटर ललित सक्सेना इलाके का चर्चित बदमाश है। उसके खिलाफ इज्जतनगर थाने में जानलेवा हमले के दो मुकदमे वर्ष 2016 और 2021 में दर्ज किए गए थे। ललित के खिलाफ कुल बीस मुकदमे दर्ज हैं।
ललित सक्सेना एक दशक पहले इज्जतनगर क्षेत्र में ऑटो स्टैंड चलाने वाले हिस्ट्रीशीटर शेरू यादव का खास गुर्गा हुआ करता था। अवैध स्टैंड की कमाई को लेकर अक्सर शहर में गैंगवार होता था। ललित इसमें जरूर शामिल होता था। शेरू यादव की हत्या के बाद उसके हत्यारोपी श्याम की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
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इसके बाद स्टैंड के गैंगवार में डीके की हत्या की गई थी। तब ललित शेरू गैंग से अलग हो गया। लगातार हत्याएं और गैंगवार से परेशान पुलिस ने स्टैंड बंद करा दिए। ललित ने खर्चा चलाने के लिए अपनी आपराधिक छवि के बूते इज्जतनगर स्टेशन के बाहर लगने वाली दुकानों से वसूली शुरू कर दी। ये दुकानें हटवा दी गईं तो ललित काफी दिनों तक गायब रहा। इसके बाद ललित ने 2021 में कृष्णा भारद्वाज पर जानलेवा हमला कर दिया।
हमला करने के बाद भी पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी और उसने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। पीलीभीत बाइपास गोलीकांड में इज्जतनगर पुलिस ने सबसे पहले ललित सक्सेना को ही पैर में गोली मारकर गिरफ्तार कर जेल भेजा था। तब से वह जिला जेल में है।