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Hathras Tragedy: हाथ से छूटकर गिरा फोन, उठाने के चक्कर में चली गई धर्मवती की जान, ऊपर से गुजर गए सैकड़ों लोग

Wed, 03 Jul 2024 03:08 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

Hathras Stampede: हाथरस की घटना में बदायूं जिले की धर्मवती (44) की जान अपना मोबाइल उठाने के चक्कर में जान चली गई। भगदड़ के दौरान उनके हाथ से मोबाइल फोन छूटकर जमीन पर गिर गया था। जिसे उठाने के लिए वह झुकीं तो उनके ऊपर से सैकड़ों लोग गुजर गए। इससे वह दोबारा नहीं उठ सकीं। 
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Hathras Stampede - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बदायूं के इस्लामनगर क्षेत्र से भोले बाबा के सत्संग में हाथरस गईं धर्मवती (44) की मौत हो गई। वह सत्संग स्थल से बाहर निकलकर आ रही थीं। तभी भगदड़ मच गई। उनके हाथ से मोबाइल फोन छूटकर गिर गया। जैसे ही वह अपना मोबाइल उठाने के लिए झुकी कि सैकड़ों लोग उनके ऊपर से निकल गए। किसी ने उनके सीने पर पैर रखा तो किसी ने उनके पेट पर। भीड़ उन्हें कुचलती रही, जिससे उनकी जान ही चली गई। जब उनके साथ आए लोगों ने उन्हें देखा तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

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इस्लामनगर थाना क्षेत्र के गांव लभारी निवासी धर्मवती पत्नी जगपाल करीब 20 लोगों के साथ सत्संग में शामिल होने हाथरस गईं थीं। उनके देवर धर्मवीर के मुताबिक यहां से हम सब लोग एक साथ गए थे लेकिन वहां पांडाल में महिलाओं को अलग बैठा दिया गया। इससे वह अपनी भाभी से अलग हो गए। जब सत्संग खत्म हुआ तो वह पहले गाड़ी पर पहुंच गए थे। कुछ देर बाद पता चला कि पांडाल से निकलने के बाद भगदड़ मच गई। उसमें कई लोग मर गए हैं। धर्मवीर गाड़ी से उतरकर मौके पर पहुंचे। 

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धर्मवती के साथ गईं महिलाओं ने बताया कि जब हम सब बाहर निकल रहे थे। उसी दौरान धर्मवती के हाथ से मोबाइल छूटकर जमीन पर गिर गया। धर्मवती मोबाइल उठाने के लिए झुकी थीं कि तभी उनके ऊपर से सैकड़ों लोग निकल गए। धर्मवती भीड़ में दब गईं और फिर जब भीड़ हटी तो उन्हें देखा गया। तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। उन्हें हाथरस अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें अलीगढ़ भेज दिया गया। देर रात धर्मवती के शव का पोस्टमार्टम हुआ। इसके बाद परिवार वाले उनके शव को घर ले गए। सुबह इस्लामनगर कस्बे में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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सेवादार अशोक कुमार बोले- हमने निकलवाईं लाशें
इस्लामनगर कस्बा निवासी अशोक कुमार भोले बाबा के सत्संग में सेवादार का काम करते हैं। उनका कहना है कि वह अपनी यूनीफॉर्म साथ लेकर जाते हैं। वह सोमवार को ही हाथरस पहुंच गए थे और पांडाल में बनाए गए कंट्रोल रूम में अपनी यूनीफॉर्म पहनी। फिर सेवा में लग गए। मंगलवार दोपहर उन्हें पता चला कि भगदड़ मच गई तो वह उनकी मदद करने के लिए दौड़ पड़े। उन्होंने कई महिलाओं को उठाकर पानी पिलाया और कई महिलाओं के ऊपर मिट्टी लग गई थी। उनके हाथ पैर धुलवाए। कई लाशों को उन्होंने उठवाकर अस्पताल तक पहुंचाया था।
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