धर्मवती के साथ गईं महिलाओं ने बताया कि जब हम सब बाहर निकल रहे थे। उसी दौरान धर्मवती के हाथ से मोबाइल छूटकर जमीन पर गिर गया। धर्मवती मोबाइल उठाने के लिए झुकी थीं कि तभी उनके ऊपर से सैकड़ों लोग निकल गए। धर्मवती भीड़ में दब गईं और फिर जब भीड़ हटी तो उन्हें देखा गया। तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। उन्हें हाथरस अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें अलीगढ़ भेज दिया गया। देर रात धर्मवती के शव का पोस्टमार्टम हुआ। इसके बाद परिवार वाले उनके शव को घर ले गए। सुबह इस्लामनगर कस्बे में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
सेवादार अशोक कुमार बोले- हमने निकलवाईं लाशें
इस्लामनगर कस्बा निवासी अशोक कुमार भोले बाबा के सत्संग में सेवादार का काम करते हैं। उनका कहना है कि वह अपनी यूनीफॉर्म साथ लेकर जाते हैं। वह सोमवार को ही हाथरस पहुंच गए थे और पांडाल में बनाए गए कंट्रोल रूम में अपनी यूनीफॉर्म पहनी। फिर सेवा में लग गए। मंगलवार दोपहर उन्हें पता चला कि भगदड़ मच गई तो वह उनकी मदद करने के लिए दौड़ पड़े। उन्होंने कई महिलाओं को उठाकर पानी पिलाया और कई महिलाओं के ऊपर मिट्टी लग गई थी। उनके हाथ पैर धुलवाए। कई लाशों को उन्होंने उठवाकर अस्पताल तक पहुंचाया था।