पहले से लकवाग्रस्त नजमा घर पर पौत्र के आने का इंतजार कर रही थीं। उसकी मौत की खबर से उनको गहरा सदमा लगा। रात एक बजे उनकी सांसें अटकने लगीं। अस्पताल ले जाने की तैयारी थी पर उन्होंने दम तोड़ दिया। दोपहर में उनको भी सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। शबाना ने बताया कि परिवार में दो मौतों से उनके शौहर वकील भी सदमे में हैं। मंगलवार रात से ही घर आने-जाने वालों का तांता लगा है।
अफसरों ने नहीं पूछा हाल
एसएनसीयू से रेफर करने में लापरवाही की वजह से हुई नवजात की मौत की जानकारी के बाद भी अफसरों ने परिजन का हालचाल नहीं पूछा। वहीं, सदमे से उसकी दादी की मौत के बाद भी उनका कलेजा नहीं पसीजा। हृदयविदारक घटना के बावजूद दोपहर 12 बजे तक अफसर इससे अनजान रहे। वार्ड मेंबर के अलावा कोई अन्य जनप्रतिनिधि भी ढांढस बंधाने नहीं पहुंचा।
दूसरे जिलों में भेजे गए बच्चों की हालत स्थिर
मंगलवार को एसएनसीयू से दूसरे जिलों में रेफर हुए बच्चों की हालत फिलहाल स्थिर है। एक बच्चा बदायूं मेडिकल कॉलेज में भर्ती है और तीन बच्चे सैफई रेफर किए गए थे। पांच बच्चे निजी अस्पतालों में भर्ती किए गए थे। महिला अस्पताल के सीएमएस के मुताबिक देर शाम उन्होंने मेडिकल कॉलेज से संपर्क कर हाल जाना। सभी नवजात की हालत फिलहाल स्थिर है।
नवजात की मौत की सूचना पर महिला अस्पताल के सीएमएस से रेफर हुए बच्चों के बारे में जानकारी ली। सभी की हालत स्थिर है। नवजात की दादी की मौत के बारे में जानकारी नहीं हो सकी। उच्चाधिकारियों से जो दिशानिर्देश होंगे, वह सहयोग करेंगे। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ