बरेली में अफसरों की सांठगांठ से शातिरों ने सरकारी पार्क की बेशकीमती जमीन का बैनामा कौड़ियों के दाम में कर दिया। 39 लाख 68 हजार रुपये कीमत की जमीन एक लाख पांच हजार रुपये में बेच दी गई। गोपनीय शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने खुली जांच की थी, जांच के दौरान गड़बड़ी मिलने पर प्रेमनगर थाने में दो लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया गया है।
विजिलेंस को जांच के दौरान पता लगा कि बीना राठौर पत्नी जगमोहन निवासी शिवनगर कॉलोनी ने प्लाट संख्या 36 सन 1987 में 25300 रुपये में खरीदा था। प्लॉट के दक्षिण में पार्क स्थित है। साल 2008 में अवैध कॉलोनी का बीडीए द्वारा नियमितीकरण किया गया। नियमितीकरण के दौरान बीडीए के जेई और शंकर सहकारी आवास समिति के तत्कालीन सचिव ने सांठगांठ कर फर्जी नक्शा पत्रावली पर लगवा दिया।
नक्शे में उस समय जेई रहे सुखपाल ने 848.75 वर्ग मीटर रकवे वाले पार्क को 588.80 वर्ग मीटर का दिखाकर बीडीए में अंकित करा दिया। इसका फायदा उठाकर समिति के तत्कालीन सचिव विपिन कुमार ने प्लाट नंबर 36 के दक्षिण में स्थित पार्क में से प्लाट नंबर 36 ए रकवा 167.22 वर्गमीटर और 36 बी रकवा 125.41 वर्गमीटर बनाए।
विपिन ने दोनों प्लाट 105000 रुपये में सचिन पुत्र जगमोहन निवासी शिवनगर के नाम कर दिये जबकि दोनों प्लाट रकवे की कीमत 39 लाख 68 हजार रुपये है। पार्क की जमीन को षड्यंत्र कर हड़प कर कब्जा कर लिया गया। विजिलेंस की जांच में शिकायत सही पायी गई। एसपी विजिलेंस सीमा जादौन ने मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की गई थी। सिफारिश के बाद विपिन कुमार और सचिन कुमार के विरुद्ध प्रेमनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गयी है।
नियमों को ताक पर रखकर पार्क में काट दिए प्लॉट
विपिन कुमार ने बीडीए के जेई से सांठगांठ कर बीडीए में पार्क का रकवा कम करके दर्ज करवा दिया। इसके बाद विपिन ने पार्क की जमीन में दो प्लाट तैयार कर उनके बैनामे बीना राठौर के पुत्र सचिन कुमार के नाम कर दिये। नियमानुसार भूखंड या भवन उन लोगों के नाम ही किये जा सकते हैं, जिन्होंने खुद या उनके परिवार के सदस्यों ने पहले से कोई भूखंड या भवन समिति में न खरीदा हो।
इस मामले में बीना राठौर के नाम प्लाट नंबर 36 पहले से था इसके बावजूद विपिन ने नियमों की धज्जियां उडा़कर बीना के बेटे सचिन के नाम प्लाट कर दिये। दोनों मिलकर सरकार को 38 लाख 63 हजार रुपये का चूना लगाया। दोनों के विरुद्ध प्रेमनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
बीडीए में भूखंड और भवनों के आवंटन में हुआ है खेल
बीडीए विभाग में भूखंड और भवनों के आवंटन में अनियमितता बरती गयी है। सूत्रों के मुताबिक कुछ साल पहले भी बीडीए की रामगंगानगर योजना में प्लाट आवंटन में लापरवाही की गयी। एक अधिकारी के रिश्तेदारों और करीबियों ने बडे़ पैमाने पर प्लाट खरीदे। एक ही परिवार के अलग अलग लोगों को प्लाट बेचे गए जो नियमों के खिलाफ है। बाद में यह प्लाट महंगे होने पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया गया। यदि बडे़ स्तर पर जांच की जाये तो बड़ा खुलासा हो सकता है।