भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 18 सितंबर को दोपहर 12:39 बजे से शुरू होकर 19 सितंबर को दोपहर 1:43 बजे तक रहेगी। बरेली के ज्योतिर्विद सौरभ शंखधर ने बताया कि उदया तिथि के अनुसार गणेश चतुर्थी का पर्व 19 सितंबर को मनाया जाएगा।
इस दिन ब्रह्म, शुक्ल और शुभ योग रहेंगे। स्वाति और विशाखा नक्षत्र की मौजूदगी इसे और भी शुभ बना रही है। गणपति की स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 10:50 से 12:52 बजे तक और अतिशुभ मुहूर्त दोपहर 12:52 से 2:56 बजे तक है।
राशियों पर प्रभाव व उपाय
ज्योतिर्विद सौरभ शंखधर ने बताया कि मेष, मिथुन, मकर राशि के लिए गणेश चतुर्थी अधिक शुभ होगी। अन्य राशियों के लिए सामान्य रहेगी, मगर गणेशजी की साधना से शुभ परिणाम आएंगे। गणेश के 12 नाम जप, अथर्व शीर्ष के नियमित पाठ से सभी मनोरथ पूर्ण होंगे।
चांद को देखने से बचें
चतुर्थी तिथि को चंद्रमा के दर्शन से बचना चाहिए। अगर चंद्रमा को देख लिया तो जिस तरह से श्रीकृष्ण को स्यमंतक मणि चुराने का कलंक लगा था, उसी तरह व्यक्ति पर झूठे आरोप लग जाते हैं। इसलिए अगर चंद्रमा को देख ही लिया तो स्यमंतक मणि की कथा को पढ़ने या सुनने से दोष मिट जाता है।
गणेश चतुर्थी की पूजा विधि
चौकी पर पीले रंग की चादर या कपड़ा बिछाकर बप्पा की मूर्ति को रखें। उनका गंगाजल से अभिषेक करें। फिर वस्त्र, फूल, माला, जनेऊ आदि से उनको सुशोभित करें।
उसके बाद अक्षत, हल्दी, पान का पत्ता, सुपारी, चंदन, धूप, दीप, नारियल आदि से पूजा करें। बप्पा को दूर्वा अर्पित करें। मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। इस दौरान ओम गं गणपतये नमो नम: मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।