बरेली में दिवाली पर असंतुलित और दूषित खानपान सेहत पर भारी पड़ा। रविवार शाम से मंगलवार दोपहर तक इलाज के लिए 102 मरीज जिला अस्पताल पहुंचे। पेट संबंधी 48 रोगियों में 22 में फूड प्वॉइजनिंग के लक्षण थे। बेड फुल होने से भर्ती कराने को लेकर नोकझोंक भी हुई।
जिला अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. एलके सक्सेना के मुताबिक त्योहार के चलते सोमवार को ओपीडी बंद रही। रविवार को सार्वजनिक अवकाश था। छोटी दिवाली की शाम से ही पेट में ऐंठन, मरोड़, दर्द, पेट फूलने और भारीपन की तकलीफ से निजात के लिए लोग पहुंचने लगे थे। जिसकी वजह दूषित भोजन और असंतुलित आहार था। इसके अलावा दुर्घटनाग्रस्त और मारपीट के भी घायल इलाज को आते रहे।
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सामान्य दिनों के सापेक्ष त्योहार पर इमरजेंसी में करीब चार गुना लोग इलाज को आए। हालांकि, दिवाली पर कोई झुलसे, जले हुए मरीज नहीं पहुंचे हैं। आयुर्वेद काय चिकित्सा प्रभारी डॉ. सीबी सिंह के मुताबिक खानपान के दौरान स्वाद के लिए तमाम लोग मिश्रित, तैलीय, भुने पकवान के साथ मिठाइयां, नमकीन खा लेते हैं। जिनकी पौष्टिकता संदिग्ध होती है। अगर नशे का सेवन कर लिया जाए तो फूड प्वॉइजनिंग की आशंका रहती है।
कुत्ते, बंदर, बिल्ली हमलावर, 250 लोगों को लगी एआरवी
दिवाली पर पटाखों के शोर और धुएं से आक्रामक पशुओं ने 250 लोगों को काटा। जो जिला अस्पताल इमरजेंसी, एआरवी क्लीनिक पर वैक्सीन लगवाने पहुंचे थे। आईडीएसपी इंचार्ज डॉ. मीसम अब्बास के मुताबिक तमाम लोग घर की छत और खुले मैदानों के अलावा सड़कों पर पटाखे जलाते हैं। इससे पशु आक्रामक हो जाते हैं। बताया कि एआरवी लगवाने पहुंचे लोगों में ज्यादातर को कुत्ते, बंदर, बिल्लियों ने काटा था।