यूपी के करीब 800 गांव बाढ़ में घिरे हैं। शाहजहांपुर में बाढ़ और विकाराल हो रही है। लखीमपुर खीरी में भी हालात बिगड़े हुए हैं। बाढ़ में बीमार लड़की को इलाज भी नहीं मिला तो उसने दम तोड़ दिया। उसके भाई उसे बेहतर उपचार के लिए कंधे पर लादकर तीन किमी पैदल भी चले। लेकिन उसने दम तोड़ दिया।
लखीमपुर खीरी के मैलानी में बाढ़ से यातायात ठप होने के कारण पलिया में भर्ती बीमार शिवानी (16) की जान नहीं बच सकी और उसने भाई के कंधे पर ही दम तोड़ दिया। बाढ़ की विभीषिका में गई शिवानी की जान से पूरा परिवार और गांव सदमे में है। शिवानी डाक्टर बनना चाहती थी। बाढ़ ने उसकी जान ही नहीं ली, बल्कि पूरे परिवार के सपने को चकनाचूर कर दिया।
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ग्राम पंचायत एलनगंज दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी जंगल के किनारे बसा हुआ है। बाघ, तेंदुओं, भालू सहित अन्य हिंसक जीव जंतुओं वाले इस खतरनाक जंगल से गुजरकर ही ग्रामीणों का आवागमन करते हैं।
गांव के देवेंद्र ने बताया कि इंटर की छात्रा पुत्री शिवानी को बुखार आने पर वह मंगलवार को पलिया में निजी चिकित्सक के पास ले गए थे। जांच में उसे निमोनिया बताया गया। हालत गंभीर देख डॉक्टर ने तुरंत बाहर ले जाने की सलाह दी थी।
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साथ गई पत्नी पुष्पा और बेटे सरोज की काफी मिन्नतों, रास्ते बंद होने का हवाला देने पर डॉक्टर ने उसे भर्ती कर लिया था। वह गांव में थे, इसलिए उन्होंने बेटे से बुधवार को शिवानी को किसी तरह अस्पताल से अतरिया रेलवे क्रॉसिंग तक लेकर आने की बात कही थी।
सोचा था कि नाव से नदी पारकर सड़क मार्ग से शिवानी को लखीमपुर या लखनऊ ले जाएंगे। बहन की जान बचाने की खातिर भाई सरोज कुमार और चचेरा भाई देशपाल मां पुष्पा के साथ बारी-बारी से शिवानी को अपने कंधों पर लादकर रेल पटरी के किनारे-किनारे चल दिये। इस दौरान शिवानी की हालत बिगड़ती जा रही थी।
सांस लेने में तकलीफ और झटके लगने के कारण क्रॉसिंग से कुछ पहले ही शिवानी ने दम तोड़ दिया। इसके बाद भाई उसके शव को ही कंधों पर लादकर क्रॉसिंग तक आए। इसके बाद वहां से शव लेकर गांव पहुंचे। बृहस्पतिवार को गांव में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
होनहार थी शिवानी... हाईस्कूल में मिले थे 76 प्रतिशत नंबर
देवेंद्र की चार संतान में मनोज कुमार, सरोज कुमार, शिवानी, संध्या हैं। पिता देवेंद्र ने बताया कि तीसरे नंबर की शिवानी पढ़ने में तेज थी। हाईस्कूल में 76 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। विज्ञान वर्ग से इस बार इंटर में आई थी। जानकी देवी इंटर कॉलेज बिजुआ में पढ़ने वाली शिवानी की ख्वाहिश डॉक्टर बनने की थी। भाई सरोज भी बी फार्मा कर रहा है। पिता ने बताया कि थोड़ी सी काश्तकारी से दोनों को बमुश्किल शिक्षा दिला रहे थे।
सरोज के सपने रहे गए अधूरे
पिता के मुताबिक सरोज का कहना था कि वह बी फार्मा कर रहा है। बहन शिवानी डॉक्टर बन जाएगी तो दोनों साथ में काम करेंगे, लेकिन शिवानी की मौत से उसके सपने भी अधूरे रह गए।