बरेली। दोस्तों को देखकर रिंग में उतरीं गीता अब शहर की पहली मिश्रित मार्शल आर्ट (एमएमए) फाइटर बनकर महिलाओं में साहस का संचार कर रहीं है। विभिन्न प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर शहर का नाम रोशन कर रहीं गीता अर्याल (32) शहर की पहली महिला एमएमए फाइटर हैं। वह फ्लाई ग्रुप में सीनियर वर्ग की खिलाड़ी हैं।
शहर की बीडीए कॉलोनी की रहने वाली गीता ने बताया कि वह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से एमपीएड कर चुकी हैं। दोस्तों को फाइट करते देखकर वह भी रिंग में उतरना चाहती थीं। इसके कुछ दिनों बाद दंगल फिल्म देखकर प्रेरित हुईं और वर्ष 2019 में एमएमए फाइटर बनने का निर्णय लिया। शुरुआत में उन्होंने इंटरनेट के सहारे इसकी जानकारी ली और अभ्यास शुरू किया। इस दिशा में कदम बढ़ाने से पहले उन्होंने पिता ईश्वर शरण अर्याल और मां शारदा को विश्वास दिलाया कि वह इस क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकती हैं। इसके बाद परिजनों ने उनका साथ दिया। फिलहाल, अभ्यास सत्र में हाथ में चोट लगने की वजह से वह घर पर आराम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि जल्दी ही वह रिंग में वापसी करेंगी।
इन प्रतियोगिताओं में जीते पदक
गीता ने भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय एमेच्योर एमएमए इंडिया ओपन में स्वर्ण पदक हासिल किया था। वह डोमिनेशन फाइट लीग में दो स्वर्ण, लखनऊ में आयोजित छठवीं एमएमए इंडिया नेशनल में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। मौजूदा समय में वह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पदक जीतने के लिए खुद को तैयार कर रही हैं। संवाद