बरेली। फरीदपुर औद्योगिक क्षेत्र में 11.66 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित 2.70 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण सड़कों की भूमि का स्वामित्व लोक निर्माण विभाग के पास न होने से फंस गया है। अब औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने वाले निजी भू-स्वामियों के साथ लोक निर्माण विभाग ने वार्ता की है।
भू-स्वामी सड़क का मालिकाना हक लोक निर्माण विभाग को देने के लिए सहमत हो गए हैं। अब यह तय होना है कि सहमति का दस्तावेजीकरण किस तरह से किया जाए ताकि बाद में कोई अड़चन न आए। इसके बाद ही यहां काम शुरू हो पाएगा।
वर्ष 2014-15 में निजी जमीन पर सड़कें और भूखंड काटकर फरीदपुर औद्योगिक क्षेत्र को कुछ लोगों ने मिलकर विकसित किया। जो लोग फैक्टरी लगाना चाहते थे, उन्हें जमीन उपलब्ध कराई गई। उस दौरान जो सड़कें बनाई गई थीं, अब वह खस्ताहाल हो चुकी हैं। वाहनों का आवागमन मुश्किल हुआ तो उद्यमियों ने इस मुद्दे को जिला और मंडल स्तरीय उद्योग बंधु की बैठक में उठाया।
फरीदपुर इंडस्ट्रियल स्टेट के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह ने कमिश्नर और डीएम से बातचीत की तब लोक निर्माण विभाग ने 11.66 करोड़ लागत का एस्टीमेट लॉजिस्टिक योजना में तैयार किया। इसकी स्वीकृति से पहले मालिकाना हक का पेंच फंसा क्योंकि इंडस्ट्रियल स्टेट की सड़कों पर उनका ही भू-स्वामित्व है, जिन्होंने इसे विकसित किया था।
इस मसले को हल करने के लिए पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता राजीव कुमार ने भूस्वामियों में एक आशीष कुमार गुप्ता के साथ बैठक की। आशीष कुमार ने बताया कि वह मालिकाना हक लोक निर्माण विभाग को सौंपने के लिए तैयार हैं लेकिन लिखापढ़ी का प्रारूप क्या होगा? यह विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट करना होगा। ब्यूरो
आए दिन कोई न कोई वाहन पलटता है। एक ट्रैक्टर की ट्राॅली तीन दिन पहले पलटी थी जिसको उठाने के लिए क्रेन की मदद लेेनी पड़ी। - गुरप्रीत सिंह, फरीदपुर इंडस्ट्रियल स्टेट के अध्यक्ष
जब ट्राॅली पलट रही है तो आप खुद समझ सकते हैं कि मौके के हालात कैसे होंगे। कार और दोपहिया से चलना मुश्किल है। उद्यमी परेशानी झेल रहे हैं। - रोहित कालरा, उद्यमी