बरेली। जिले की तहसीलों में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में सबसे अधिक मामले अतिक्रमण के आए। दो साल से तो कोई इससे भी अधिक समय से एक ही समस्या के हल के लिए चक्कर काटते हुए मिला। हैरत इस बात की है कि एक तरफ जिला प्रशासन अवैध कब्जे हटवा रहा है। दूसरी तरफ सरकारी व निजी जमीन पर कब्जे के मामले कम नहीं हो रहे हैं। संवाद
मीरगंज। तहसील सभागार में डीएम अविनाश सिंह और एसएसपी अनुराग आर्य जन सुनवाई कर रहे थे। यहीं पर नथपुरा गांव की पूर्व प्रधान चंद्रप्रभा, पंचायत सहायक प्रिंसी, बीडीसी श्याम वीर, सोहन लाल व निर्मला अधिकारियों के सामने पेश हुईं।
इन लोगों ने डीएम-एसएसपी को बताया कि गांव के पंचायत भवन पर कब्जा है। इसे कब्जामुक्त कराने को वह लोग दो साल से अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैंं।
इस मामले में एसडीएम कोर्ट ने 17 नवंबर 2023 को कब्जेदार को पंचायत भवन से बेदखल करने का आदेश जारी किया था। कब्जेदार हाईकोर्ट चला गया था, जहां उसकी अपील खारिज हो गई थी, लेकिन पंचायत भवन पर अब तक कब्जेदार काबिज है। समस्या सुनकर डीएम ने लेखपाल पुष्पेंद्र को तलब किया और एसडीएम को कब्जा हटाने को कहा है।
इसी तरह गांव मल्साखेड़ा के पूर्व प्रधान मोतीराम वर्मा ने नाला पर कब्जा के संबंध में समस्या बताई। इन्होंने डीएम-एसएसपी को बताया कि कई गांवों के बारिश का पानी नाला से पास होकर भाखड़ा नदी में गिरता है, लेकिन नाले पर लोगों ने कब्जा कर उसका प्रयोग करने लगे हैं।
कब्जेदारों ने आसपास आवासीय कॉलानी के लिए प्लॉटिंग कर दी है। नाले से पानी की निकासी बंद हो गई है। डीएम ने दोनों मामले में कार्रवाई के लिए आदेश दिए हैं। इस तरह से 84 शिकायतें आईं, जिसमें से पांच का निस्तारण करा दिया गया। संवाद