उझानी (बदायूं)। कस्तूरबा बालिका आवासीय विद्यालय की आठ छात्राओं को विद्यालय परिसर की सफाई न करने पर बुधवार रात उनके कमरे से बाहर निकाल दिया गया। छात्राएं काफी देर परिसर में ही खड़ी रहीं। हालांकि विद्यालय की एक शिक्षिका ने उन्हें अपने पास रोक लिया लेकिन बृहस्पतिवार सुबह छात्राएं जब घर पहुंचीं तो उनके परिवारवाले उन्हें लेकर विद्यालय आ पहुंचे। वार्डन से उनकी तीखी नोकझोंक हुई। वार्डन ने पुलिस को बुला लिया। दोपहर में बीएसए और जिला कोआर्डिनेटर भी पहुंचे। छात्राओं समेत वार्डन का पक्ष सुना। इसे लेकर गहमागहमी का माहौल बना रहा।
मामला बुधवार रात करीब 11 बजे का है। छतुइया गांव स्थित कस्तूरबा बालिका आवासीय विद्यालय में छतुइया की भी छात्राएं पढ़ती हैं। आठ छात्राओं का आरोप है कि वार्डन उनसे सफाई कराती हैं। विरोध करने पर सजा भी दे देती हैं। बुधवार रात में वार्डन ने उन्हें कमरे से यह कहते हुए बाहर निकाल दिया कि घर जाइए। छात्राएं काफी देर तक परिसर में खड़ी रहीं। एक अन्य शिक्षिका ने उन्हें सुबह बात करने के लिए कहकर रोक लिया। इसके बाद बृहस्पतिवार सुबह छात्राएं घर पहुंचीं। परिवार के लोगों को पूरे मामले की जानकारी दी । ऐसे में कई छात्राओं के परिवार वाले और अन्य लोग विद्यालय पहुंचे। छात्राओं और उनके परिवार ने वार्डन पर गंभीर आरोप लगाए। जिससे वहां हंगामा हो गया। यहां तक कि पैरोकारी में पहुंचे ग्राम प्रधान के परिवार के योगेंद्र सिंह को धकेल दिया गया। आरोप है कि वार्डन ने उनसे अभद्रता की। बाद में वार्डन ने अभिभावकों पर बेवजह हंगामा करने का आरोप लगाते हुए पुलिस को बुला लिया। मौके पर पहुंचे प्रभारी निरीक्षक अजय सिंह चाहर ने शिकायत अफसरों से करने की बात कहकर दोनों पक्षों को शांत किया। वार्डन ममता यादव ने पुलिस को बताया कि किसी भी छात्रा को परेशान नहीं किया गया है। उन्हें दबाव में लेने का प्रयास किया जा रहा है। दोपहर बाद विद्यालय पहुंचे बीएसए महेंद्र प्रताप सिंह और जिला कोआर्डिनेटर प्रशांत कुमार ने वार्डन और छात्राओं से जानकारी लेने के बाद विवाद सुलझा दिया। दोनों अफसर डेढ़ घंटा तक विद्यालय में ही रहे। इस दौरान उन्होंने स्टॉफ के अलावा शिक्षिकाओं से भी पूरे मामले की जानकारी की।
पुलिस के सामने रो पड़ीं कुछ छात्राएं
पुलिस विद्यालय में पहुंची तो दो-तीन छात्राएं हकीकत बयां करते समय भावुक हो उठीं। उन्होंने रो-रोकर वार्डन की शिकायत की। बताया कि पिछले महीने खिड़की का शीशा टूट गया था। तब वार्डन ने दो घंटे तक उन्हें कक्षा में खड़ा रखा था। जबकि शीशा खिड़की पर बंदर के कूदने से टूटा था। इसके बाद प्रभारी निरीक्षक ने वार्डन से भी जानकारी की।
कस्तूरबा विद्यालय की वार्डन ने जिला कोआर्डिनेटर को छात्राओं और उनके अभिभावकों की ओर से हंगामा किए जाने की जानकारी दी थी। इसके बाद वह कोआर्डिनेटर के साथ विद्यालय पहुंचे तो ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया जो छात्राओं के उत्पीड़न का हो। पता लगा कि छात्राओं में ही आपस में विवाद हो गया था।
-महेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए
किसी भी छात्रा को रात में विद्यालय से बाहर नहीं निकाला गया। बालिकाएं खुद ही कमरे से बाहर निकलीं और हंगामा करने लग गईं। उन्हें किसी ने भड़काने का काम किया है। सच्चाई से विभागीय अफसरों को भी अवगत करा दिया गया है। सुबह भी उनके परिवार ने बेवजह हंगामा किया।
- ममता यादव, वार्डन, कस्तूरबा विद्यालय