खूंखार हो गए कुत्तों को लावारिस छोड़ देने की प्रशासन की जिद लोगों पर भारी पड़ रही है। पांच साल के मासूम की मौत को 24 घंटे नहीं बीते थे, आवारा कुत्तों ने चार और बच्चों पर हमला कर दिया। ग्रामीणों के आ जाने से चारों की जान बच गई। एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। गुरसौली गांव में अपने मौसा-मौसी के घर आया मिलक (रामपुर) के रामचंद्र का आठ साल का बेटा अमित मंगलवार शाम साढ़े पांच बजे बकरी चराने खेतों में गया था। अचानक 13 आवारा कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर सिर, गाल, पीठ और जांघ को नोच डाला। पास के खेत में काम कर रहे मौसा ने ग्रामीणों की मदद से कुत्तों को भगाया। अमित को गंभीर हालत में बरेली भेजा गया है। सुबह करीब 11 बजे मोहल्ला आजाद नगर में आवारा कुत्तों ने हाकिम सिंह के आठ साल के बेटे हर्षित सिंह पर हमला कर दिया। वह दोस्तों के साथ खाली पड़े मैदान पर खेल रहा था। हर्षित को घिरा देखकर दोस्त जान बचाकर भाग गए। हर्षित के दाएं पैर को कुत्ते ने बुरी तरह से नोच लिया। वहां से गुजर रहे लोगों ने लाठी डंडों से कुत्तों को खदेड़ा। बच्चे को सीएचसी ले जाया गया। इसी मोहल्ले से सौ मीटर की दूरी पर बसे मोहल्ला अब्बास नगर में भी कुत्तों ने आबिद अली की बेटी फातमा पर हमला बोल दिया। वह पिता को खाना देने खेत पर जा रही थी। अचानक तीन कुत्तों ने उसे दौड़ाकर पैर में नुकीले दांत लगा लिए। उसे भी सीएचसी भेजा गया। देर शाम को रजपुरा गांव के इशहाक अहमद भी अपनी छह साल की बेटी फिजा को लेकर सीएचसी पहुंच गए। उन्होंने बताया कि चार बजे वह नदी किनारे खेत से लौट रही थी अचानक 15 से ज्यादा कुत्ते उस पर झपट पड़े। उन्होंने लाठी-डंडों से कुत्तों को भगाया। फिजा को सीएचसी से जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
खबर छपी तब एसडीएम समेत अफसर पहुंचे मोहल्ला सकलैनी
बहेड़ी। मोहल्ला सकलैनी में मुहम्मद जुबैर के पांच साल के बेटे मोहम्मद आमिर की मौत को कल तक हलके में ले रहे अफसर मंगलवार को तब हरकत में आए जब अमर उजाला ने इस लापरवाही को प्रमुखता से प्रकाशित किया। डीएम ने तड़के ही एसडीएम को फोन पर लाइन पर लिया और उन्हें जानकारी न देने व लेखपाल को पीड़ित के घर न भेजे जाने पर नाराजगी जताई। इसके बाद एसडीएम पारस नाथ मौर्या ने सुबह करीब दस बजे वन विभाग के डिप्टी रेंजर गोविंद राम के साथ मृतक मोहम्मद आमिर के घर का रुख किया। मोहल्ले के लोगों ने प्रशासन और नगर पालिका की लापरवाही की शिकायत की। बेटे का फोटो हाथ मेें लिए रोती बिलखती मां फरहाना ने एसडीएम से कहा कि साहब आप अब आए हो जब मेरा बेटा दुनिया से चला गया। मोहल्ले के लोगों मुआवजा दिलाने की मांग की।
तो गलती आरामशीन वाले की थी
एसडीएम ने उस आरामशीन का भी निरीक्षण किया जहां फरहाना आवारा कुत्तों के झुंड होने की बात कह रही थीं। एसडीएम के निर्देश पर वहां दो कुत्तों की फोटो ली गई। नगर पालिका और खुद की जिम्मेदारी से बचते हुए एसडीएम ने मृतक बच्चे के पिता से आरामशीन वाले के खिलाफ तहरीर लिखकर देने को कहा। दोपहर बाद दंपति थाने पहुंचकर तहरीर दे आए। एसडीएम और सीओ ने इंस्पेक्टर से जांच करने को कहा और आरोप सिद्ध होने पर आरामशीन मालिक के खिलाफ मुकदमा कायम करने के आदेश दिए।
समाज सेवा मंच प्रशासन के खिलाफ दायर करेगा याचिका
बहेड़ी। बरेली समाज सेवा मंच के अध्यक्ष नदीम शम्सी, राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल, महेश पंडित, राम रतन भी मंगलवार को आमिर के घर पहुंचे। उन्होंने इसे प्रशासन और नगर पालिका की लापरवाही बताते हुए कहा कि इस मामले को डीएम के सामने रखा जाएगा। पीड़ित परिवार को मुआवजा देने और लापरवाह अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी। नहीं सुनी गई तो तो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया जाएगा। हाईकोर्ट में भी प्रशासन के खिलाफ याचिका दायर की जाएगी।
आम के पेड़ के नीचे चाय पी और हो गई बैठक
बहेड़ी। हर बार की तरह इस बार भी प्रशासन और पुलिस ने आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए बुलाई गई बैठक की औपचारिकता निभा दी। करीब डेढ़ घंटे चली बैठक में पुरानी रणनीति पर ही विचार हुआ। चाय पीने के बाद सभी चलते बने।
पूर्वाह्न करीब साढ़े 11 बजे थाना परिसर में आम के पेड़ के नीचे बैठक बुलाई गई। इसमें एसडीएम पारसनाथ मौर्य, सीओ प्रमोद यादव, वन विभाग के डिप्टी रेंजर गोविंद राम, इंस्पेक्टर अजय श्रोतिया और व्यापार मंडल के चंद लोग शामिल हुए। एसडीएम ने लोगों से अपने बच्चो का विशेष ध्यान रखने की हिदायत दी। फिर से टेबल प्लान बना। डिप्टी रेंजर ने फिर अपना बयान दोहराया कि ये आवारा कुत्ते हैं इन्हें पकड़ने में वन विभाग प्रशासन की मदद के सिवा कुछ नहीं कर सकता है। एसडीएम ने नगर पालिका के स्वास्थ्य निरीक्षक राजेश यादव से आवारा कुत्तों के बधियाकरण कराये जाने को कहा। तय हुआ कि बुधवार से नगर में मुनादी कराई जाएगी कि पालतू कुत्तों को लोग अपने घरों में रखें। अगर वह सड़क पर घूमता पाया गया तो नगर पालिका की टीम उसे पकड़ कर ले जाएगी। इसके बाद समाचार पत्रो में विज्ञापन छपवाकर आवारा कुत्तों के बधियाकरण कराए जाने का टेंडर प्रकाशित कराया जाएगा। बैठक में सलीक कातिब, अमित अग्रवाल डब्बू भइया, सलीम चंदा, विष्णु कुमार गोयल, दिलीप गर्ग, राजेंद्र रस्तोगी ,जब्बार जाफरी आदि थे।
वह दिन याद कर भर जाती हैं आंखें
मासूमों को खोने का दर्द नहीं भूले हैं परिवार वाले
बहेड़ी। ये वे परिवार हैं जिनके घरों के चिराग को खूंखार कुत्तों ने बुझा दिया। उनकी आंसू आज भी नहीं सूख पाए हैं। अपनों को खोने का दर्द दिल में है। गुस्सा है तो सिस्टम के खिलाफ। जिसकी लापरवाही से आज भी कई घरों की किलकारियां हमेशा के लिए बंद हो रही हैं। अमर उजाला टीम ने मंगलवार को कुछ परिवारों से बात कर उनकी पीड़ा को जाना।
शरीफ नगर गांव की पांच साल की करुणा अपनी बहन अंशिका की मौत को अब तक नहीं भूल पाई है। नींद में ही चीखकर बहन को याद करती है। दरअसल 12 जनवरी 2015 की दोपहर करीब तीन बजे उसी के सामने छह साल की अंशिका को खूंखार कुत्तों ने निवाला बना दिया था। दोनों सहेलियों के साथ गांव के पास एक खेत में गन्ना तोड़ने गई थीं। अचानक अंशिका पर दस कुत्ते टूट पडे़। सहेलियां भाग गईं लेकिन करुणा बहन का हाथ थामें रही। कुत्ते अंशिका को खेतों में घसीट ले गए तो करुणा भागकर घर पहुंची। जब तक परिवार के लोग पहुंचते वह दम तोड़ चुकी थी। इस घटना के बाद करुणा उदास रहने लगी। मां रोशनी अग्रवाल ने कहा कि प्रशासन की लापरवाही से बच्ची की जान चली गई।
नवायल गांव के 12 साल के अशोक के घर वाले भी सात अगस्त 2014 के दिन को नहीं भूले हैं। भाटिया फार्म पर चारा काटते समय खूंखार कुत्तों ने अशोक को नोचकर मार डाला था। पिता भैरो प्रसाद और माता भगवान देई अपने लाल की फोटो को सीने पर लगाकर रो पड़े। कहने लगे हमारा तो सब कुछ खत्म हो गया। अब क्या बचा साहब। सारे सपने और उम्मीदें खत्म हो गई हैं। यही हाल शीशगढ लखनपुर गांव के श्यामवीर के घर का है। 31 जनवरी 2015 को उनकी बेटी रिंकी को कुत्तों ने मार डाला था। पूरा परिवार आज भी गमजदा है। हर त्योहार पर लाड़ली की याद आती है। मीरगंज के रसूलपुर गांव में 12 जुलाई 2014 को शारिक को भी कुत्ते नोचकर खा गए। परिवार के लोग अब भी उस दिन को याद कर रो पड़ते हैं।
खुले में मीट बिकेगा तो खूंखार होंगे ही कुत्ते
बहेड़ी। नगर के कई इलाकों में अवैध रूप से मांस की दुकानें चल रही है। स्लाटर हाउस छह महीने से बंद पड़ा है। मीट कारोबारियों ने अपने घरो में अवैध स्लाटर हाउस बना रखे हैं। सुबह नगर के गलियों की नालियों से बहने खून इस बात की तस्दीक करता है। पुलिस और प्रशासन की चुप्पी से अवैध करोबार धड़ल्ले से हा रहा है। नैनीताल रोड पर एसडीएम आवास से चंद कदम दूर और नगर पालिका के गेट के सामने चार दुकानें हैं। यहा से मीट के अवशेष सड़क पर फेंक दिए जाते हैं। यहां दिनभर आवारा कुत्तों का जमघट लगा रहता है। अवैध स्लाटर हाउस वाले मीट के अवशेष को रात में ही बुग्गी या ठेलो पर लाद कर बाईपास रोड, रुड़की रोड, नरायननगला रोड में खेतो या नदियों के किनारे फेंक जाते हैं। नगर के मोहल्ला बाजार वाली गली, टांडा, इस्लामनगर, नईबस्ती, तलपुरा, शाहगढ आदि इलाकों में अवैध स्लाटर हाउस खुले हैं। इन पर न तो प्रशासन ने और न ही नगर पालिका ने रोक लगाई है।
वोट की फिक्र करने वाले भी वोटरों के बच्चों की मौत पर चुप थे। बहेड़ी क्षेत्र में एक के बाद एक दस बच्चों को कुत्तों ने मार डाला लेकिन मामला न विधानसभा में पहुंचा न जिला स्तर पर सक्रियता दिखी। हां हर मौत के बाद एक दो दिन अभियान का नाटक जरूर हुआ जो इस बार भी हो रहा है।
बहेड़ी में किच्छा नदी के किनारे एक दर्जन से ज्यादा गांवों में कुत्तों का आतंक है। मंगलवार को कुत्तों ने चार और बच्चों पर फिर हमला किया। इस बार विधायक अताउर्रहमान कुछ सक्रिय हुए। एसडीएम पारसनाथ मौर्य और ईओ नगरपालिका समेत तमाम अफसरों को लेकर पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और सांत्वना दी। तत्काल बीस हजार रुपये की मदद भी दी गई अभियान चलाने की भी बात हुई।
पहले भी अफसरों को निर्देश दिए गए थे कुत्तों को पकड़वाएं। अभियान भी चला था लेकिन कुछ दिनों बाद बंद हो गया था। अब फिर एसडीएम, ईओ और अन्य अफसरों को बुलाया था। अभियान शुरू किया जा रहा है। पूरी तरह सुरक्षा की जाएगी- अताउर्रहमान विधायक, बहेड़ी
‘ कुत्ते मांस खाकर हिंसक हो रहे हैं। बच्चों पर इनके हमलों की घटनाएं अलग-अलग गांवों में घट रही हैं। जाल मंगवा लिया गया है। बुधवार से वन विभाग और नगरपालिका की टीम संयुक्त रूप से कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाएगी। व्यापार मंडल से बात कर पीड़ित परिवार को 25 से 30 हजार तक की आर्थिक सहायता भी दिलाई जाएगी।’ पारसनाथ मौर्य, एसडीएम बहेड़ी
जिम्मेदारों के बोल-
प्रशासन व नगर पालिका को आवारा कुत्तों के खिलाफ अभियान चलाना चाहिए। प्रशासन अभी तक कुत्तों को पकड़ने की तैयारी भी नहीं कर पाया। बेहद शर्मनाक बात है-
नसीम अहमद, बसपा नेता बहेड़ी
नगर पालिका के खिलाफ मुकदमा कायम कराने की मैं दिन भर प्रशासन से मांग करता रहा। इसमें पूरी लारवाही नगर पालिका की है। पता नही प्रशासन पालिका प्रशासन को बचाने में क्यों लगा हुआ है
- सलीक कातिब, सपा नेता
इधर मैंने कोई ज्ञापन नहीं दिया। मैं बाहर गया हुआ था। दूसरा मेरी पत्नी का निधन हो गया। हां जब मैं विधायक था तब जिन जिन गांव में कुत्ते के काटने से मौत होने या घायल होने के मामले सामने आये वहां प्रशासन को भेजा। -छत्रपाल सिंह गंगवार, पूर्व विधायक
नगर पालिका की टीम को सक्रिय कर दिया गया हैं। कल से पालतू कुत्तों को घरो में बंद रखने की हिदायत दी गई हैं। नगर पालिका आवारा कुत्तों के खिलाफ अभियान चलाएगी। कुछ लोग मासूम की मौत का राजनीतिकरण कर रहे हैं। अंजुम रशीद, चेयरमैन नगर पालिका बहेड़ी
जब हम चेयरमैन थे तो हमने कुत्तों को पकडकर नसबंदी कराई थी। पालिका प्रशासन इसमें पूरा दोषी है- जमील अहमद पूर्व चेयरमैन नगर पालिका बहेड़ी