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मजबूर न करे सरकार... दो दिन ही नहीं बेमियादी भी कर सकते हैं हड़ताल

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प्रदर्शन करते बैंक कर्मी।
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निजीकरण के विरोध में दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन बैंक कर्मियों ने किया प्रदर्शन
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हड़ताल से करीब 250 करोड़ का कारोबार हुआ प्रभावित, परेशान होते रहे ग्राहक
बरेली। केंद्र सरकार के बैंकों के निजीकरण के लिए लाए गए बैकिंग कानून (संशोधन विधेयक-2021) के खिलाफ दो दिवसीय हड़ताल के बृहस्पतिवार को पहले दिन यूनाइटेड फ ोरम आफ बैंक यूनियंस ने प्रदर्शन किया। पटेल चौक के पास एक होटल परिसर में सभा की। इस मौके पर बैंक कर्मियों ने कहा कि यदि सरकार ने बैंकों के निजीकरण के प्रयास बंद नहीं किए तो बैंकों में दो दिन नहीं बल्कि बेमियादी हड़ताल कर दी जाएगी।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के पदाधिकारियों ने बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे केनरा बैंक, पंजाब नैशनल बैंक की मुख्य शाखा, बैंक ऑफ बड़ौदा के सामने प्रदर्शन कर उन्हें बंद कराया गया। इसके बाद करीब 11 बजे सभी हड़ताली कर्मचारी सेंट्रल बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचे। यहां से यूनाइटेड फोरम यूनियंस के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट ओपी वडेरा के नेतृत्व में पटेल चौक के पास स्थित होटल परिसर में पहुंचे। यहां आयोजित सभा को पदाधिकारियों ने संबोधित किया।
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यूनाइटेड फोरम के संयोजक दिनेश सक्सेना ने कहा कि शीत कालीन सत्र में सरकार बैंकों के निजीकरण के लिए कानून ला रही है। यह देश के लोगों के साथ धोखा है। देश के करोड़ों लोगों के खाते बैंकों में हैं। वहां उनका धन सुरक्षित हैं। लोगों को सरकार पर भरोसा है, लेकिन सरकार उसी भरोसे को तोड़कर बैंकिंग सिस्टम को निजी हाथों में देने की तैयारी कर रही है। ग्रामीण बैंक अधिकारी संघ के संतोष तिवारी ने कहा कि सरकार बैंकों को पूंजीपतियों के हाथ में देने जा रही है। यह बेहद खतरनाक होगा, क्योंकि बैंक राष्ट्रीयकरण से पहले पूंजीपतियों के ही हाथों में थे, तब जनता की जमा पूंजी हड़प ली जाती थी।
स्टेट बैंक स्टॉफ एसोसिएशन के नवींद्र कुमार ने कहा कि हम सभी सरकार की निजीकरण की नीतियों की भर्त्सना करते हैं और बैंकों के वर्तमान स्वरूप को बनाए रखने की मांग करते हैं। यूनियन फेडरेशन के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने कहा कि सरकार एकतरफा फैसला ले रही है। हम सभी इस समय दो दिन की हड़ताल कर रहे हैं, यदि सरकार अड़ी रही तो बैंकों के इतिहास में पहली बार अनिश्चकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला ले सकते हैं। इस दौरान रिटेरीज एसोसिएशन के गोपाल वर्मा, रेलवे के मुकेश सक्सेना, इंकलाबी मजदूर केंद्र के ध्यानचंद्र मौर्य ने हड़ताल का समर्थन किया। सभा को बीडी सिंह, अनुराग, राहुल सिंह, पीके माहेश्वरी, पुनीत टंडन, अरविंद आनंद, चरण सिंह, यादव, आशीष शुक्ला, सतीश शर्मा, अविनाश सुमन, रंजन मोहले, आरबी खन्ना, एसके सब्बरवाल, शिखा रानी आदि ने भी संबोधित किया।
सबकुछ ठीक चल रहा है। बैंक अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। आमजन को बैंकिंग सेक्टर से अच्छी मदद मिल रही है, फिर निजीकरण क्यों किया जा रहा है। सरकार इसका जवाब दे दे। - रंजन मोहिले
सरकार सिर्फ निजीकरण की बात कर रही है। बैंक का निजीकरण क्यों करना है, क्या कारण हैं, क्या बैंक विफल रहे हैं। बैंक अच्छा नहीं कर पा रहे हैं। कोई तो वजह बताए आखिर निजीकरण क्यों करना है। - लेखराज
यह देशवासियों के साथ धोखा है। कर्मचारियों को भी धोखा दिया जा रहा है। कल यदि निजी बैंक अचानक बंद हो जाएं और लोगों का पैसा डूब जाए तो कौन जिम्मेदार होगा। - अरुण प्रजापति
बैंकों का निजीकरण करना पूरी तरह गलत है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम अभी दो दिन की हड़ताल पर हैं। सरकार पीछे नहीं हटी तो संगठन आगे भी प्रदर्शन करेगा। - अभिषेक
बीमा कर्मियों ने भी भोजनावकाश में हड़ताल का किया समर्थन
निजीकरण के विरोध में बैंक कर्मियों की हड़ताल का बीमा कर्मियों ने भी भोजनावकाश में प्रदर्शन करके समर्थन किया। डीडीपुरम स्थित मंडल कार्यालय पर नारेबाजी कर सभा की। अध्यक्षता करते हुए बीमा कर्मी संघ बरेली डिवीजन के अध्यक्ष अरविंद देव सेवक ने कहा कि सरकार सभी सरकारी क्षेत्रों को खत्म करना चाहती है। बैंकों ने देश के छोटे-बड़े सभी उद्योगों को मजबूत करने और उन्हें आगे बढ़ाने में सहयोग किया है। ट्रेड यूनियन फेडरेशन की उप महामंत्री और बीमा कर्मचारी संघ की महामंत्री गीता शांत ने केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ बड़ी लड़ाई का आह्वान किया। कहा, राष्ट्रीयकरण के समय कुल पांच हजार करोड़ की जमा धनराशि थी जो आज 157 लाख करोड़ हो गई है। इस पर पूंजीपतियों की गिद्ध दृष्टि लगी है। इस मौके पर अनामिका सारस्वत, सचिन शुक्ला, अनिल शर्मा, साथी नृपेंद्र सिंह, मुस्तकीम, प्रीति अग्रवाल, नीरू कपूर आदि मौजूद रहीं।
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एक दिन में 250 करोड़ का लेनदेन प्रभावित
यूनियन फेडरेशन के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने बताया कि पहले दिन की हड़ताल से जिले में करीब 250 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ है। यह हड़ताल शुक्रवार को भी जारी रहेगी। वहीं, बैंकों में बृहस्पतिवार को कामकाज बंद रहने के चलते लोग परेशान होते रहे। नकदी के लिए लोगों ने एटीएम का सहारा लिया लेकिन तमाम जगह वे भी खाली मिले।
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