बरेली। श्री त्रिवटीनाथ मंदिर में हुए समता सत्संग सम्मेलन के अंतिम दिन वक्ताओं ने मानव जीवन, कर्म और मुक्ति से जुड़े विषयों पर प्रवचन दिए। इसमें हल्द्वानी के प्रेमी विकास सचदेवा ने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य अपना वास्तविक स्वरूप भूलता जा रहा है। सच्चा मनुष्य वही होता है जो सत्य का पालन करे, पाप और पुण्य का भेद समझे। झूठ न बोले। किसी की निंदा न करे और सही मार्ग पर चले।
मनोज मिश्रा ने बताया कि कर्म की गति गहन है और हर व्यक्ति को अपने कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख किया और लोगों को सोच-समझकर कार्य करने का उपदेश दिया। श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन के बारे में बताते हुए, उन्होंने कहा कि मनुष्य को फल की चिंता किए बिना निष्काम भाव से कर्म करना चाहिए, क्योंकि यही मोक्ष का मार्ग है। शिव नाथ अग्रवाल ने बताया कि प्रारब्ध के कारण मनुष्य कई बार मजबूर हो जाता है, लेकिन कर्म करने की स्वतंत्रता उसके पास होती है। उन्होंने कहा कि जैसा मनुष्य कर्म करता है, वैसे-वैसे उसके संस्कार बनते जाते हैं और वह उन्हीं संस्कारों के अधीन होकर कर्म करने को बाध्य हो जाता है। उन्होंने शास्त्रों के आधार पर समझाया कि अच्छे कर्म और ईश्वर का स्मरण ही इस बेचैनी को दूर करने का मार्ग है। इस मौके पर सत्संग का संचालन प्रेमी मनोज मिश्रा ने किया। सत्संग के विश्राम के बाद सभी श्रद्धालुओं ने गुरुप्रसाद ग्रहण किया।