बरेली। दस महीने पहले डिजिटल अरेस्ट की शिकार हुईं शिक्षिका ने तत्परता बरतकर रकम होल्ड करा दी। अब कोर्ट के जरिये रकम वापसी के लिए उन्हें रिपोर्ट की जरूरत है। दस महीने बाद भी उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी है।
बेसिक शिक्षा परिषद की शिक्षिका प्रियंका यादव ने बताया कि वह महानगर कॉलोनी की निवासी हैं। उन्हें पांच अगस्त 2024 को पुलिस की वर्दी पहने साइबर ठगों ने कॉल की। उन्हें धमकाया कि आपका बेटा दिल्ली क्राइम ब्रांच थाने में अरेस्ट है। उस पर दुष्कर्म का केस है। तुरंत रुपये डाल दो अन्यथा वह जेल चला जाएगा। शिक्षिका के मुताबिक, वह घबरा गईं और ठगों के बताए नंबर पर तीस हजार रुपये भेज दिए। कुछ देर बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ तो 1930 नंबर पर कॉल की। अपनी बैंक शाखा में जाकर शिकायत दर्ज करा दी। उन्होंने ठगी की रकम तो होल्ड करा दिया, पर आज तक रुपये वापस नहीं मिल सके। कोर्ट में अर्जी दी तो वहां एफआईआर की जरूरत बताई गई। शिक्षिका ने बताया कि वह और उनके पति कई बार इज्जतनगर थाने जा चुके हैं, लेकिन पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रही है। ब्यूरो