राष्ट्रीय बालिका दिवस : शिक्षा, खेल और स्वरोजगार में भी जिले की बेटियां लहरा रहीं परचम
पीलीभीत। जिले की बेटियां पढ़ और खूब आगे बढ़ रही हैं। अपनी मेहनत और लगन से शिक्षा, खेल, स्वरोजगार और व्यापार में भी नाम कमा रही हैं। खेलों में तो जिले की कई प्रतिभाओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में मनवा रही हैं। शतरंज, क्रिकेट, कुश्ती, खो-खो आदि खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन कर पुरस्कार जीत रही हैं। शहर की एक बेटी पीलीभीत टाइगर रिजर्व में आने वाले सैलानियों को भ्रमण कराकर बाघ की दीदार करा रही हैं। इसी तरह अन्य क्षेत्रों में भी जिले की बेटियों ने जलवा बिखेरा है।
अदिती और समीक्षा के इशारे पर घूमते शतरंज के मोहरे
शहर के अंगूरी देवी सरस्वती बालिका इंटर काॅलेज की कक्षा आठ की छात्रा अदिति और कक्षा 12वीं की छात्रा समीक्षा गुप्ता की उंगलियों के इशारे पर शतरंज के मोहरे घूमते हैं। शहर की दोनों बेटियों ने शतरंज में जिले का नाम पूरे देश में रोशन किया है। अदिति और समीक्षा का राष्ट्रीय स्तरीय शतरंज प्रतियोगिता में प्रतिभाग के लिए चयन हो चुका है। अदिति का चयन 14 वर्ष आयु वर्ग और समीक्षा का 19 वर्ष आयु वर्ग में हुआ है। दोनों ही बेटियां जिला और राज्य स्तर तक कई पुरस्कार जीत चुकी हैं।
अक्षरा ने कुश्ती के दांवपेच से कमाया नाम
बिलसंडा ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय मीरपुर हर्रायपुर से कक्षा आठ पास करने वाली अक्षरा कुशवाहा ने कुश्ती के ऐसे दांवपेच दिखाए कि उनका चयन अयोध्या के डॉ. भीमराव आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय क्रीडा संकुल के छात्रावास में हो गया। अक्षरा ने जिला और राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर कई पुरस्कार जीते हैं। अक्षरा ने बीते वर्ष कानपुर में हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीता था। अयोध्या में हुई 67वीं राज्य स्तरीय माध्यमिक क्रीड़ा प्रतियोगिता में भी रजत पदक हासिल किया था। वर्ष 2023 और 2024 में भी पुरस्कार जीता।
डर, झिझक को दूर कर पीटीआर में गाइड की भूमिका निभा रहीं नेहा
शहर की रहने वाली नेहा लोधी ने वर्ष 2018 में पीलीभीत टाइगर रिजर्व के पर्यटन क्षेत्र में बतौर गाइड जिम्मेदारी निभानी शुरू की। नेहा बताती हैं कि वह जंगल की झाड़ियां और शांत माहौल से डर कर दूर रहती थीं, लेकिन एक समय ऐसा आया कि वह ही उनका भविष्य बन गया। गाइड की जिम्मेदारी निभाकर वह सैलानियों को पीटीआर की खासियत बयान करने लगी। डर, झिझक को दूर कर वह आत्मनिर्भर बनी और लगातार सात सालों से पीटीआर में गाइड की भूमिका निभा रही हैं। इकलौती महिला गाइड के रूप में पीटीआर में शुरुआत करने वाली नेहा को देख अब पांच अन्य महिलाएं भी पीटीआर में गाइड की जिम्मेदारी निभा रहीं हैं। संवाद