जिला अस्पताल से चोरी नवजात को खरीदने के मामले में बाल कल्याण समिति के मजिस्ट्रेट ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इसमें बच्चा बेचने वालों को ही नहीं खरीदने वालों को भी आरोपी बनाया जाएगा। बच्चा बेचने वालों में जिला अस्पताल स्टाफ के भी कुछ लोगों के शामिल होने का संदेह है। पुलिस का मानना है कि एक कर्मचारी तो रिटायरमेंट के बाद भी नए शिकार की तलाश में ही जिला अस्पताल आता है। इधर, एसएसपी मुनिराज जी. ने मामले की जांच एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) के इंस्पेक्टर को जांच सौंपी है। उधर, उत्पीड़न की शिकायत पर जब बाल कल्याण समिति ने जांच शुरू की तो किसी तरह इसकी भनक आरोपी सोनू को लग गई। इस पर उसने परिवार के साथ बच्चे को लेकर बरेली छोड़ने की तैयारी कर ली, लेकिन उसका मंसूबा पूरा नहीं हो सका। उसके भागने से पहले ही किला पुलिस और चाइल्ड हेल्प लाइन की टीमों ने छापामार कर मासूम को अपने कब्जे में ले लिया।
किला के खन्नू मोहल्ला के सोनू सक्सेना के घर में छापामारी करके किला पुलिस, चाइल्ड हेल्प लाइन और एएचटीयू की संयुक्त टीम ने तीन साल के आरुष को अपने कब्जे में लिया था। पुलिस छानबीन में सामने आया कि सोनू सक्सेना और उसकी पत्नी प्रभा ने विवाह के 15 साल बाद भी कोई बच्चा न होने पर जिला अस्पताल में काम करने वाले बिहारीपुर के एक वार्ड ब्वाय के जरिये आठ घंटे के बच्चे को 80 हजार रुपये में खरीदा था। बच्चा चोरी करने में ममता नाम की एक महिला की भी भूमिका रही थी। बच्चे को शुक्रवार को बाल कल्याण समिति के मजिस्ट्रेट डीएन शर्मा के सामने पेश किया गया। बच्चे से बातचीत के बाद उसे न्यू बॉर्न बेबी फोर्ड अनाथालय में भेज दिया गया है। शुक्रवार को पूरे दिन मासूम अनाथालय में उदास, गुमसुम रहा।
40 दिन बाद कारा पर अपलोड होगा डाटा
मजिस्ट्रेट के मुताबिक बच्चे के असली माता-पिता को ढूंढा जा रहा है। 40 दिनों तक उनके न मिलने पर बच्चे का डाटा सेंट्रल एडोप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (कारा) की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा। इसके बाद कोई भी नि:संतान दंपति बच्चे को गोद ले सकेगा। इस दौरान बच्चे को अनाथालय में ही रखा जाएगा।
सोनू के पिता ने आरुष के नाम कर दी है संपत्ति
इंस्पेक्टर केके वर्मा ने बताया कि सोनू के पिता ने अपनी संपत्ति का एक हिस्सा आरुष के नाम कर दिया है। बच्चे को बंधक बनाए जाने के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। अलबत्ता उसके साथ मारपीट की बात सामने आई है, लेकिन तीन साल में वह सोनू और उसकी पत्नी से उन्हें माता-पिता मानकर भावनात्मक रूप से जुड़ चुका था।