बदायूं। अलापुर थाने के गेट के सामने बुधवार दोपहर हत्यारोपी सुमित (26) ने तमंचे से गोली मारकर जान देदी। उस पर थाने के सामने दुकान चलाने वाले व्यापारी के 32 लाख रुपये आ रहे थे, जिस पर उसके भाई को पुलिस ने थाने में बैठा लिया था और उस पर रुपये वापस करने का दबाव बनाया जा रहा था। इस मामले में परिवार वालों ने व्यापारी पर ही हत्या का आरोप लगाया है।
सुमित गुप्ता अलापुर कस्बे के वार्ड नंबर तीन का निवासी था। उस पर 27 अगस्त 2021 की शाम हजरतपुर में सराफा और कपड़ा व्यापारी राजेश गुप्ता उर्फ राकेश की गोली मारकर हत्या का आरोप था। इस मामले में पुलिस ने उसे और उसके चार साथियों को जेल भेजा था। सुमित पिछले माह ही 25 मार्च को जमानत पर छूटकर आया था। बताते हैं कि उस पर थाने के सामने दुर्गा पाइप एंड पेंट स्टोर के मालिक मदनलाल गुप्ता के 32 लाख रुपये आ रहे थे। मदनलाल गुप्ता ने इसकी अलापुर थाना पुलिस से शिकायत की थी। बुधवार सुबह मदनलाल का बेटा गौरव, सुमित के घर रुपये मांगने गया था। इस दौरान दोनों की नोकझोंक भी हुई थी। सुमित के भाई दिलीप ने यूपी 112 पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को थाने आने के लिए कहा था। इसके बाद दिलीप थाने पहुंच गया था। पुलिस ने उसे बैठा लिया था और सुमित को थाने बुलाने का दबाव डाल रही थी।
इसी क्रम में दोपहर करीब पौने दो बजे सुमित अलापुर थाने के गेट और मदनलाल गुप्ता की दुकान के सामने पहुंचा और तमंचे से कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली। सूचना पर एसपी सिटी प्रवीन सिंह चौहान मौके पर पहुंचे। उन्होंने सुमित के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। इधर, सुमित के परिवार वालों का आरोप है कि व्यापारी ने ही सुमित की हत्या की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। मौके से तमंचा और कारतूस कब्जे में ले लिया है।
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अलापुर कस्बे में दुर्गा पाइप एंड पेंट स्टोर के सामने सुमित नाम के युवक ने गोली मारकर आत्महत्या की है। वह हजरतपुर में हुई सराफा व्यापारी राजेश उर्फ राकेश गुप्ता की हत्या में नामजद था। उस पर पेंट स्टोर मालिक के 32 लाख रुपये उधार आ रहे थे। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है।
- प्रवीन सिंह चौहान, एसपी सिटी
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आरोप : व्यापारी से पड़ोसी का फर्ज निभा रही थी अलापुर पुलिस
अलापुर (बदायूं)। अलापुर थाने के सामने सुमित के आत्महत्या करने से पुलिस की बड़ी पोल खुल गई है। आरोप है कि कई दिन से पुलिस व्यापारी के पड़ोसी होने का फर्ज निभा रही थी। जब से सुमित जमानत पर घर लौटा था। तब से पुलिस उसे लगातार थाने बुला रही थी। उसके न आने पर पुलिस ने उसके भाई को थाने में बैठा लिया था। इससे हत्यारोपी सुमित मानसिक दबाव में आ गया और थाने के सामने उसने गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
अलापुर थाना और पाइप स्टोर मालिक की दुकान आमने-सामने है। व्यापारी को यह भी पता रहता है कि थाने में कौन आ रहा है या कौन जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि व्यापारी की थाने के इंस्पेक्टर समेत तमाम पुलिस कर्मियों की अच्छी पहचान है। पुलिसकर्मी अक्सर थाने से निकलकर व्यापारी की दुकान पर चले जाते हैं। बताते हैं कि व्यापारी काफी समय से सुमित व उसके परिवार वालों से रुपये वापस कराने की कोशिश कर रहा था लेकिन वह कुछ और समय मांग रहे थे। इससे व्यापारी को लग रहा था कि शायद अब उसके रुपये नहीं मिलेंगे। इस पर व्यापारी ने पुलिस को अपनी समस्या बताई। आरोप है कि पुलिस एक्शन में आ गई और भाई दिलीप को उठा लिया लेकिन सुमित हत्थे नहीं चढ़ा। पुलिस और व्यापारी सुमित को थाने बुलाने की कोशिश में थे।
सूत्रों का कहना है कि पुलिस ने सुमित और उसके परिवारवालों पर दबाव बनाने के लिए व्यापारी से सौदा किया था। हालांकि इस संबंध में पुलिस को तहरीर देने की बात सामने नहीं आई है।
इधर पुलिस का कहना है कि सुमित और व्यापारी के बीच लेनदेन का विवाद चल रहा था। एसपी सिटी प्रवीन सिंह चौहान ने अपने बयान में 32 लाख रुपये के लेनदेन की बात स्वीकार भी की है।
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भाई ने व्यापारी पर लगाया हत्या का आरोप
हत्यारोपी सुमित के भाई दिलीप ने व्यापारी पर सीधे तौर पर हत्या का आरोप लगाया है। उसने पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। दिलीप का आरोप है कि उसका भाई दुकानदार के पास पहुंचा। उससे रुपयों के लेनदेन को लेकर बात चल रही थी। इसी दौरान व्यापारी ने अपनी दुकान और थाने के सामने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी। तमंचा और कारतूस वहीं डाल दिए, जिससे ये मामला आत्महत्या का माना जाए। हालांकि पुलिस इसे मानने को तैयार नहीं है। पुलिस आत्महत्या ही मान रही है।
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सुमित ने भाड़े के शूटरों से कराई थी सराफा व्यापारी की हत्या
27 अगस्त 2021 को सुमित ने हजरतपुर निवासी राजेश गुप्ता उर्फ राकेश की भाड़े के शूटरों से हत्या कराई थी। राजेश हजरतपुर में सराफा और कपड़े की दुकान चलाते थे। सुमित उनके परिवार की एक युवती से शादी करने पर अड़ा था। राजेश गुप्ता इसके विरोध में थे। आरोप है कि इसलिए सुमित ने उन्हें रास्ते से हटाने के लिए पश्चिम बंगाल निवासी अमन वर्मा और राजस्थान निवासी श्रीराम सोनी को बुलाया था। सुमित दोनों के साथ दिल्ली में काम करता था। तभी उनकी दोस्ती हो गई थी। अमन वर्मा और श्रीराम सोनी ने रुपये लेकर राजेश की हत्या की थी। इसमें पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। बाद में इसमें म्याऊ निवासी चांद मोहम्मद और अलापुर निवासी मेहंदी हसन के नाम प्रकाश में आए थे।