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जमीन फटी और खेतों में पड़ गईं दरारें

Thu, 23 Jun 2016 02:26 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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जमीन फटी
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शीशगढ़। चार दिन पहले हुई बारिश के बाद  रुस्तमनगर उर्फ ऊंचागांव के कई किसानों के खेतों की जमीन फट गई। इसमें एक किलोमीटर तक गहरी और लंबी दरारें पड़ गईं। ग्रामीणों में दहशत है। कृषि विभाग की टीम भी मुआयना करने पहुंची लेकिन वह भी इसके कारण को लेकर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पा रही है। कृषि विभाग की टीम ने किसानों से इलाके की जमीन पर खेती करने से मना कर दिया है। जिन खेतों की जमीन फटी है, उसके पास में बहगुल नदी बह रही है। गांव के पश्चिम में ओम प्रकाश, सियाराम, तुलाराम पाल, राजेंद्र, शंकर लाल, महबूब शाह, पूरन लाल, लेखराज, छोटे लाल, नरेश, सलामत अली खां सहित दर्जन भर किसानों के खेत धान रोपने के लिए खाली हैं और शंकर लाल, पूरन लाल व लेखराज के खेतों में गन्ना की फसल खड़ी है। यह जमीन 19 जून को शाम करीब चार बजे फटी। किसान ओम प्रकाश ने अपने खेत पर जाकर देखा तो उसमें लंबी और गहरी दरारें पड़ी थी, जिसे देखकर उनके होश उड़ गए। यह दरारें दूसरे किसानों के खेतों में होकर नदी की तरफ बढ़ती दिखाई दीं तो उन्होंने गांव में सूचना दी। इसकेे बाद गांव के लोग और ग्राम प्रधान वीरपाल मौके पर पहुंचे तो देखा के दर्जनों किसानों की जमीन में दो फिट चौड़ी और तीन फिट से पांच फिट गहरी दरारें पड़ी हैं। सभी दरारों का रुख बहगुल नदी की तरफ है। ग्राम प्रधान ने कृषि विभाग के अधिकारियों को फोन से सूचना दी तो कृषि विभाग के कृषि प्रादेशिक सहायक देश राज अपनी टीम के साथ हल्का लेखपाल को लेकर मौके पर पहुंच गए। उन्होंने किसानों से फिलहाल खेतों मे काम करने को मना कर दिया है। 
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पहले कभी ऐसा नहीं हुआ
60 वर्षीय किसान नेतराम का कहना है कि उन्होंने यह नजारा पहली बार ऐसा है। 62 वर्षीय रहमत शाह ने बताया कि पहले बारिश के समय जगह-जगह कुछ हल्के गड्ढे जरूर पड़ जाते लेकिन ऐसा कभी सुना नहीं। दरारें पड़ी जमीन लगभग 12 एकड़ हैं और दरारें लगभग एक किलोमीटर तक हैं। कहीं चौड़ी तो कहीं ज्यादा गहरी हैं। किसानों का कहना है कि हमें इस जमीन में धान रोपने पर जान का खतरा है क्योंकि यह दरारें पानी भरने के बाद और गहरी हो सकती हैं।
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टीम को गांव में भेजा था। जमीन क्यों फटी, इसकी वजह अभी समझ नहीं आ रही है। इसकी जांच विशेषज्ञ ही कर पाएंगे।
-डॉ. रामतेज यादव, जिला कृषि अधिकारी
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