जांच के बाद 26 जुलाई 2014 को पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी। अभियोजन की ओर से सुनवाई के दौरान नौ गवाह और 12 साक्ष्य पेश किए गए। मोबाइल सीडीआर समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने चंदन गिरि को हत्या का दोषी करार देते हुए मंगलवार को सजा सुनाई।
मोबाइल फोन ने खोला राज, जुड़ती गईं कड़ियां
विवेचना के दौरान पुलिस ने बाबूराम के मोबाइल फोन की जांच की तो पता लगा कि 11 फरवरी को बाबूराम का मोबाइल फोन पांच सेकंड के लिए चालू हुआ था। उसमें दूसरा सिमकार्ड डाला गया। जांच करते हुए पुलिस चंदन गिरि के भांजे धर्मेंद्र कश्यप तक पहुंची। धर्मेंद्र ने बताया कि उसके मामा चंदन गिरि ने उसे मोबाइल फोन दिया था। उसने चेक करने के लिए सिमकार्ड डाला था। इसके बाद कड़ियां जुड़ती गईं और पुलिस चंदन गिरि तक पहुंच गई।