थाना प्रेमनगर के प्रभारी निरीक्षक ने अगर ऐसा किया है तो निश्चित ही पुलिस प्रशासन के उच्चाधिकारियों के मौखिक आदेश पर किया होगा। उनके द्वारा कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। इसके तहत अभियुक्त के घर पर समन चस्पा किया जा सकता था। ऐसा न करके अभियुक्त को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। एसएसपी प्रेमनगर थाना प्रभारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें। विभागीय व दंडात्मक कार्रवाई भी की जाए।
यह था मामला
बरेली में वर्ष 2010 में जुलूस-ए-मोहम्मदी के दौरान शहर में दो समुदायों के बीच हिंसा भड़की थी। कुतुबखाना बाजार चौराहे के पास सब्ज़ी मंडी में दंगाइयों ने करीब 20 दुकानों में आग लगा दी थी। शहर के सभी स्कूल, कॉलेज बंद करने के आदेश दे दिए गए थे और उपद्रवग्रस्त इलाकों में हेलीकॉप्टर से निगरानी की गई थी। पूरे मंडल में इससे सांप्रदायिक सौहार्द खतरे में पड़ गया था। कई दिन तक कर्फ्यू लगा था। इसी मामले में कोर्ट ने आईएमसी अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा को दंगे का मुख्य साजिशकर्ता माना है।